नगर क्षेत्र पर लूम पर साड़ी की बुनाई करता बुनकर।संवाद
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मऊ। संक्रमण का असर जैसे-जैसे कम हो रहा है। वैसे-वैसे व्यापारिक गतिविधियां बढ़ने लगी है। इससे साड़ी कारोबार को गति मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है। बाहर के कारोबारियों के आने से अब व्यापार में 10 से 15 प्रतिशत की उछाल आई है। साड़ी कारोबारियों को उम्मीद है कि यही स्थिति बरकरार रही है तो कारोबार पटरी पर आ जाएगा। जिला मुख्यालय सहित कोपागंज, वलीदपुर, मुहम्मदाबादगोहना, घोसी सहित जिले के कई कस्बों में पावरलूम पर साड़ियां बुनने वाले बुनकर मजदूरों की संख्या चार लाख से अधिक है। इन बुनकरों का परिवार साड़ियों की बुनाई से मिलने वाली मजदूरी से चलता है। पिछले लगभग डेढ़ साल से अधिक समय से संक्रमण ने साड़ी कारोबारियों की कमर तोड़ दी। कारोबारियों के अनुसार, संक्रमण से पूर्व जिले का साड़ी कारोबार लगभग 350 करोड़ प्रति माह का टर्न ओवर था। लेकिन संक्रमण से यह घटकर 150 करोड़ प्रति माह पहुंच गया। दूसरी लहर के बाद साड़ी कारोबार में सुधार हो ही रहा था कि तीसरी लहर से कारोबार एक बार फिर न्यूनतम स्तर पर आ गया। महानगरों सहित अन्य शहरों से व्यापारियों की आवाजाही ठप हो गई थी। आर्डर मिलना बंद होने से साड़ी बुनाई पर ब्रेक लग गया था। बुनकरों के समक्ष रोटी रोटी का संकट खड़ा हो गया था। अब संक्रमण का ग्राफ कम होने से कारोबारियों की आवाजाही बढ़ी है और कारोबार मेें उछाल आया है। ऐसे में जहां साड़ी कारोबारियों में उत्साह है तो वहीं बुनकरों में भरपूर काम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। साड़ी कारोबारी इस्मामुल हक और साजिद अनवर ने बताया कि संक्रमण का बुनाई पर असर पड़ा है। संक्रमण कम होने से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी है। हालात ऐसे ही रहे एक बार फिर साड़ी कारोबार पटरी पर लौट सकता है।