नगर के बालनिकेतन स्थित रेलवे फाटक बंद होने के बाद रूके लोग।संवाद
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मऊ। बाल निकेतन रेलवे क्रासिंग पर बनने वाले आरओबी की फाइल दो साल से शासन में लटकी है। हालांकि इस पर रेलवे ने भी स्वीकृति दे दी है और हाईकोर्ट का भी निर्देश हो चुका है। लेकिन अब तक इसका रास्ता साफ न होने से नगरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है वह भी तब जब यहां की दो बड़ी शख्सियतें शासन में मंत्री पदों पर हैं। शहर के बीचों बीच स्थित इस रेलवे फाटक के बार-बार बंद होने से घंटों घंटों जाम मेें फंसना लोगों की नियति बन चुका है। क्रासिंग पर आरओबी की पहल हाई कोर्ट के निर्देश पर चार साल पहले शुरु हुई थी। रेलवे की स्वीकृति के बाद प्राक्कलन तैयार हुआ। सेतु निगम की ओर से दो साल पहले वित्तीय स्वीकृति के लिए इसे शासन को भेजा गया। जो अभी लंबित है। जनपदवासियों ने जिले के दो काफी प्रभावशाली नगर विकास और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र से आरओबी की राह में आ रही रुकावटों को दूर कराने की उम्मीद जताई है। समाजसेवी देवप्रकाश राय की ओर से उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका पर कोर्ट के हस्तक्षेप पर आरओबी के लिए रेलवे उच्चाधिकारियों ओर जिलाधिकारी के बीच कई दौर की बैठकों के बाद प्रस्ताव तैयार किया। अप्रैल 2020 में प्रस्ताव स्वीकार कर राज्य सरकार ने स्वीकृति देते हुए उत्तर प्रदेश सेतु निगम को आगणन देने का निर्देश दिया था। रेलवे और सेतु निगम के अधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी, जलनिगम, बिजली विभाग, नगरपालिका के अफसरों के साथ बैठकें कर आरओबी के लिए भवन, भूखंड के मुआजवों आदि पर 104 करोड़ रुपयों का स्टीमेट तैयार कर सेतु निगम मुख्यालय लखनऊ भेजा। वहां से पास होने पर पीडब्ल्यूडी से स्वीकृति मिलने के बाद अब शासन में फाइल अटकी है। डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर उप्र सेतु निगम, आजमगढ़ आरएसराय ने बताया कि आरओबी की फाइल 2020 में शासन से स्वीकृति मिलने के बाद स्टीमेट तैयार कर पीडब्ल्यूडी को भेज दी गई। वहां से स्वीकृति के बाद अब वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन में अटकी है।