दोहरीघाट डिपो के वर्कशाप में खड़ी बसें।संवाद
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मऊ। परिवहन निगम की उदासीनता के चलते मऊ डिपो की कई बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। आए दिन रास्ते में बसों के खराब होने की शिकायत भी मिलती है। हालांकि बसों की मरम्मत के लिए काफी बड़ा वर्कशाप भी अलग से बनाया गया है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण बसों का संचालन नहीं हो रहा है। वहीं ठीक से देखभाल न होने से कई बसें रास्ते में ही धोखा दे जाती है। डिपो में वर्तमान में कुल 49 निगम की बस तथा एक अनुबंधित बसों का बेड़ा है। इनमें से छह बसें मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं। यह बसें टायर, इंजन, सेल्फ, बैट्री और शीशा के अभाव में काफी समय से खड़ी हैं। जबकि पार्ट्स के लिए कार्यशाला प्रबंधन की तरफ से सेवा प्रबंधक आजमगढ़ से मांग भी की गई है। लेकिन उदासीनता के कारण बसों की मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है। हालांकि नियमित तौर पर बसों की कार्यशाला में जांच और फ्यूल फिलिंग के बाद ही उन्हें भेजा जाता है। लेकिन सही से जांच और मरम्मत के अभाव में कई बार बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। नियमानुसार बसों को 12 लाख किलोमीटर और 10 वर्ष पूरे होने पर उनके संचालन पर रोक लगा दी जाती है। ऐसे बसों की निलामी कर दी जाती है। लेकिन मऊ डिपो में चार बसें 12 लाख किलोमीटर का सफर पूरा कर चुकी हैं। लेकिन 10 वर्ष पूरा न होने के कारण वह चलाई जा रही हैं। रोडवेज कार्यशाला के फोरमैन अजय सिंह ने बताया कि बसों की मरम्मत के लिए पार्ट्स मंगाए जा रहे हैं। वर्तमान में छह बसें मरम्मत के अभाव में तथा 10 चालक और परिचालक के अभाव में खड़ी हैं। चार बसें नियत किलोमीटर पूरा कर चुकी हैं, लेकिन अवधि पूरी न होने के कारण उन्हें चलाया जा रहा है। दोहरीघाट : उत्तर प्रदेश परिवहन निगम शाखा दोहरीघाट की स्थिति पहले से काफी दयनीय हो गई है। आए दिन बसों में खराबी के कारण कई बसों का संचालन समुचित तरीके से नहीं हो पाता है। स्थिति यह है कि डिपो में कुल 52 बसें है, जिसमें से 15 बसें काफी दयनीय स्थिति में हैं। इनमें से 10 गाड़िया नीलामी के लिए रखी गई है। कुछ गाड़ियां पार्ट्स के अभाव में खड़ी हैं। फोरमैन राममूर्ति ने बताया कि अवधि और किलोमीटर पूरी कर चुकी 10 गाड़ियां नीलामी के लिए रखी गई हैं।