ब्राह्मण विकास परिषद के तत्वावधान में मंगलवार को नगर के मातापोखरा स्थित शीतला माता मंदिर परिसर में भगवान परशुराम की जयंती मनाई गई।
इस मौके पर परिषद के संरक्षक डॉ. एससी तिवारी ने कहा कि भगवान परशुराम ऋचीक के पौत्र और जमदग्नि के छोटे पुत्र थे । अन्याय के खिलाफ सच्चाई का साथ देने वाले ऋषि थे। रामजी उपाध्याय ने कहा कि भगवान शंकर ने इन्हें अमोघ अस्त्र परशु दिया था जिसके कारण इनका नाम भगवान परशुराम पड़ गया। परिषद के अध्यक्ष ऋषिकेश पांडेय ने कहा कि पितृ भक्ति के के रूप में सदा याद किए जाएंगे। एक बार इनकी माता जी से कोई अपराध हो गया था तो जमदग्नि ऋषि ने अपने सभी पुत्रों को बुलाकर कहा कि इनका बधकर दिया जाए परंतु कोई तैयार नहीं हुआ ,परशुराम जी ने पिता के आदेश के पालन में माता एवं सभी भाइयों का वध कर दिया तो जमदग्नि ऋषि ने प्रसन्न होकर कहा कोई वर मांग लो तो भगवान परशुराम ने वर में माता एवं सभी भाइयों को पुनर्जीवित करने के लिए मांगा। अपने माता और भाइयों को जीवित करने के लिए वर मांग लिया और वे सभी लोग पुनर्जीवित हो गए। वर्तमान परिवेश के लिए भगवान परशुराम के द्वारा किए गए सभी कार्यो द्वारा समाज में न्याय को स्थापित किया जा सकता है। इस अवसर पर अमरनाथ मिश्र, विजय शंकर तिवारी, रामजपित पांडेय, वीएन पांडेय, ओम प्रकाश शुक्ला, डॉ. पंकज उपाध्याय, जय नारायण द्विवेदी, पंकज व संजय कुमार त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।