जिले में आयुर्वेद तथा यूनानी से पंजीकरण कराकर चिकित्सक धड़ल्ले से एलोपैथ से नर्सिंग होम चला रहे हैं। चिकित्सक बीमारी में एलोपैथ का उपयोग ज्यादा कर रहे हैं। ऐसे में कई मौत की घटनाएं सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। सीएमओ कार्यालय के आंकड़े के हिसाब से जिले में एलोपैथ पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए कुल 126 पंजीकरण है। इसमें महज 36 नर्सिंग होम है। शेष 90 में 72 प्राइवेट ओपीडी और 18 ने पैथालॉजी का रजिस्ट्रेशन किया गया है। क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी अधिकारी कार्यालय से करीब 414 नर्सिंग होमों का पंजीकरण किया गया है। इसमें आयुर्वेदिक पद्धति से 199 और यूनानी पद्धति से लोगों का उपचार कराने के लिए 215 नर्सिंग होम शामिल हैं। लेकिन यह नर्सिंग होम आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति से पंजीकरण कराने के उपरांत लोगों का उपचार एलोपैथ से कर रहे हैं। कभी-कभी यह अस्पताल विकट स्थिति उत्पन्न कर दें रहें। बीते वर्ष कोपागंज में एक मरीज की शिकायत पर जब जांच की गई तो ऐसा ही मामला सामने आया था। वहीं बीते दिनों मधुबन तहसील के मर्यादपुर में प्रसव के बाद एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने डाक्टर पर लापरवाही के साथ बिना पंजीयन के अस्पताल चलाने का का आरोप लगाया था। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी डॉ.जयराम यादव कहते हैं कि आयुर्वेदिक पद्धति के 15 डाक्टरों को एलोपैैैथ की दवा की प्रैक्टिस पर छूट दी गई है। लेकिन वह आईवी सेट का प्रयोग नही कर सकते। लेकिन पंजीकरण की आड़ में यह धड़ल्ले से एलोपैथ की दवाओं का प्रयोग करते हैं। हालांकि विभाग समय समय पर जांच कर कार्रवाई करता है। सीएमओ डॉ. एसएन दुबे ने बताया कि बिना पंजीयन के संचालित अस्पतालों को लेकर दो डिप्टी सीएमओं की निगरानी में टीम गठित की है। यह टीम समय समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई करती रहती है। शिकायत पर पहले नोटिस देने के बाद कार्रवाई की जाती है।