मौलाना शमशाद।घोसी की रमजान की खबर में प्रतिक्रिया
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घोसी। अल्लाह ने अपने बंदों के लिए माह-ए-मुबारक में बेपनाह बरकत और रहमत रखी है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि इस माह की कद्र करें और इबादत से मुंह न मोड़े। यह बातें नगर के मदापुर निवासी मौलाना शमशाद ने कहीं। रमजान के महत्व को समझाते हुए कहा कि अल्लाह ने पाक कुरआन को इसी माह नाजिल किया था। इस माह में रोजा रखने वालों, इबादत करने वालों के लिए जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं। बीमारी या कमजोरी के अलावा रोजे को छोड़ा नहीं जा सकता। यदि बीमार हैं और रमजान के रोजे नहीं रखे तो ठीक होने पर रोजे रखने होंगे। यदि रोजे रखने की ताकत नहीं है, तो साठ दिन तक किसी गरीब को दोनों वक्त का खाना खिलाना होगा। अल्लाह ने रोजेदारों के लिए बेपनाह इनाम रखे हैं। रोजे की हालत में भूख और प्यास बर्दाश्त करना सब्र सीखता है। मुल्क में पिछले एक माह से लाक डाउन जारी है, इसलिए मालदार मुसलमान गरीब रोजेदारों की दिल खोलकर मदद करें। मौलाना ने मुसलमानों से अपील की कि वह रोजे रखे और घर पर ही नमाज अदा करें। साथ ही हर नमाज और इबादत में अल्लाह तआला से कोरोना के खात्मे की दुआ भी करें। ताकि मुल्क इस महामारी से बच सके।