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सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं का रोका जाए निजीकरण

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मऊ। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) सहित 10 श्रमिक संगठनों के तत्वावधान में सदस्यों तथा पदाधिकारियों ने शुक्रवार को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। साथ ही जमकर नारेबाजी किया। साथ ही प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को संबोधित मुख्य राजस्व अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर जिला मंत्री सूर्यदेव पांडेय ने कहा कि केंद्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा महामारी के अवसर का लाभ उठाते हुए मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर लगातार हमले कराने के साथ-साथ श्रम कानूनों में एक तरफा घोषणा कर रही है। श्रम कानूनों से पूंजीपतियों को तीन साल तक छूट देने का अध्यादेश जारी कर चुकी है। बिजली कानून में संशोधन की बात हो रही है। मंडी कानून में परिवर्तन किया जा रहा है। यह सब काम सरकार जनता, किसानों, मजदूरों को सुविधाएं दिलाने के साथ-साथ देश के विकास को गति देने के नाम पर कर रही है। आयकर न देने वाले परिवारों को छह माह तक प्रतिमाह 7500 रुपया दिया जाए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंद सभी व्यक्तियों को 10 किलो प्रति यूनिट अनाज प्रतिमाह दिया जाए। मनरेगा मे 200 दिन का काम दिया जाए। मजदूरी 500 रूपया प्रतिदिन किया जाए। प्रवासी मजदूरों को कवर करते हुए इसका विस्तार किया जाए। शहरी क्षेत्र के लिए भी मनरेगा की तरह से योजना बनाया जाए। उत्तरप्रदेश में स्थायी श्रम समिति का गठन किया जाए। प्रत्येक जनपद तथा मंडलों मे शासनादेश के अनुपालन मेें उद्योग बंधु की बैठक की तरह से पूर्व की भांति जिला श्रमबंधु एवं मंडल स्तरीय श्रमबंधु की बैठक प्रत्येक माह कराया जाए। प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का निदान हो सके। रेलवे, कोयला, रक्षा, बैक, बीमा एवं बिजली सहित तमाम सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के निजीकरण को रोका जाए। प्रदर्शन करने वालों में सूर्यदेव पांडेय, विक्रम राम, बालाजी मोदी, भीमा यादव, सुभाष गौतम, सुशील दूबे, राधेश्याम सैनी, प्रमोद कुमार राय, संजय कुमार, शिवपरसन राम, सत्यराम यादव, सुशील पांडेय, लक्ष्मण, रामअवध, दुर्गविजय सिंह, फूलचंद, मालती देवी, राजकुमार आदि शामिल रहे।
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