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सार्वजनिक स्थानों पर इफ्तार पार्टी से परहेज करें रोजेदार

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मऊ। रोजेदार सार्वजनिक स्थानों पर रफ्तार पार्टी करने से परहेज करें। कोरोना संक्रमण काल में जीवन संकट में हैं एसे में अपना और अपने परिजनों का विशेष ख्याल रखें। उक्त बातें जकाउल्लाह काशमी ने कही। उन्होंने कहा कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए पौष्टिक भेजन करें। घोसी नगर के पट्टीमुहम्मद उर्फ काजीपुरा निवासी जकाउल्लाह काशमी ने कहा कि रोजा अर्थात व्रत सभी धर्मों में होता है। परंतु लगातार तीस दिन का व्रत केवल इस्लाम धर्म में ही होता है। रोजा कोई भी रख सकता है। इसमें धर्म की कोई पाबंदी नहीं है। जिसकी भी इच्छा हो रोजा पूरे अकीदत के साथ रख कर अपनी मनोवांछित कामना कर सकता है। ईश्वर अर्थात अल्लाह उसकी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। रोजेदार केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि सभी लोगों के साथ समभाव रख समरसता का संदेश दें। जिसकी अहम भूमिका रोजा इफ्तार पार्टी निभाती है। क्योंकि इससे आपसी दुराव व मनमुटाव समाप्त होता है। परंतु इस समय कोरोना महामारी का संक्रमण चल रहा है, जिससे मानव जीवन संकट में है। इसलिए रोजेदार सार्वजनिक इफ्तार पार्टी से परहेज करें। बुजुर्ग एवं बच्चे रोजा रखने से परहेज करें। क्योंकि इस उम्र में शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बहुत कमजोर होती है, जिसके कारण जीवन संकट में पड़ सकता है। रोग प्रतिरोधी क्षमता बनाए रखने के लिए समय-समय पर अन्न एवं जल सहित पोष्टिक तत्वों की आवश्यकता होती है।आप सभी मानव जीवन को बचाए रखने के लिए घर से बाहर निकलने से परहेज करें यदि बगैर घर से निकले कार्य नहीं होने वाला है तो मात्र कार्यों की पूर्ति करने तक ही निकलें और पुन: घर वापस आकर पूरी तरह से सेनेटाइज कर ले।तरावीह की नमाज व अन्य धार्मिक कार्य घरों में ही अदा करें।
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