जिला अस्पताल के वार्ड में खिड़की के किनारे किया गया पीक।संवाद
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मऊ। भीषण गर्मी से डायरिया, उल्टी, दस्त, घबराहट के मरीजों की संख्या में 20 फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ है। ऐसे में जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी-पीएचसी की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। लेकिन अस्पतालों में इसको लेकर इंतजाम नाकाफी हैं। चिकित्सकों की कमी के साथ वार्डो में गर्मी से बचाव को लेकर बेहतर व्यवस्था न होने से भर्ती मरीजों और उनके तीमारदार परेशान हैं। जिले में इन दिनों पारा 42 से 43 डिग्री के आसपास है। जिसके चलते लोगों में बीमारियां बढ़ने लगी है। डायरिया, बुखार, उल्टी, दस्त के अलावा आंख, स्कीन, सर्दी, जुखाम के मरीजों की भरमार हो गई है। जिला अस्पताल की ओपीडी में सर्दी के दिनों की अपेक्षा मरीजों की संख्या बढ़ गई है। आम तौर पर 400 से 500 की ओपीडी 650 से 700 तक पहुंच चुकी है। सीएमएस डॉ. बृजकुमार का दावा है कि गर्मी के चलते बढ़ते मरीजों को लेकर पूरी तैयारी है। लू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनाया गया है। वहीं हर वार्डो में खराब पड़े पंखे, खिड़कियों पर पर्दे लगवाने का कार्य पूरा हो चुका है। जबकि हकीकत इसे इतर है। एक वार्ड में न तो पंखे की व्यवस्था दिखी न ही वार्ड में लगे पलंग पर बिस्तर। किसी-किसी वार्ड में व्यवस्था कुछ ठीक रही। सीएमएस का कहना है कि गर्मी को देखते हुए बढ़ रहे मरीजों के संबंध में अस्पताल प्रशासन ने अपनी पूरी तैयारी कर रखा है। सभी जरूरी दवाएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। जिला अस्पताल में ओपीडी में आने वाले मरीजों का उपचार तो मिल रहा है, लेकिन वह पूरी तरह से नहीं। इसके पीछे चिकित्सकों की कमी। यहां ईएमओ के अलावा कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट के साथ स्किन विशेषज्ञ सहित दूसरे विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। वहीं भले ही अस्पताल प्रशासन पर्याप्त दवाओं की मौजूदकी का दावा कर रहा हो लेकिन आज भी कई डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे है। ओपीडी भले ही सुबह आठ बजे शुरू होती है, मगर चिकित्सक दस बजे से पहले नहीं पहुंचते। ऐसे में मरीजों को लंबा इंतजार करना भारी पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के वार्ड नंबर 8 में खराब पंखा और बिना बिस्तर के पड़ा बेड।संवाद- फोटो : MAU