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ओआरएस और जिंक की दी गोलियां

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जिला महिला अस्पताल में बच्चों के परिजनों को ओआरएस और जिंक की गोली बांटते सीएमओ डा.एस एन दूबे।संवा - फोटो : MAU
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मऊ। जिला महिला चिकित्सालय में एक से 15 जून तक चलने वाले सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा (आईडीसीएफ) कार्यक्रम अभियान की शुरुआत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ एसएन दूबे और महिला चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंद्रा सिन्हा ने अस्पताल में किया। इस दौरान मरीजों और धात्री महिलाओं को ओआरएस व जिंक की गोली देकर शुरुआत की गई। उन्हें इसके प्रयोग के बारे में भी बताया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्याम नरायन दुबे ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की बाल मृत्युदर 48 / 1000 जीवित जन्म है, (एसआरएस-2019) बाल्यावस्था में 05 वर्ष से कम आयु के बच्चों में लगभग 10 प्रतिशत मृत्यु दस्त के कारण होती है। प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग 25 हजार बच्चों की दस्त के कारण मृत्यु का कारण बनता है, तथा दस्त रोग मृत्यु के प्रमुख कारणों में दूसरे स्थान पर है। जिसका उपचार ओआरएस एवं जिंक की गोली मात्र से किया जा सकता है। इससे शिशु मृत्यु-दर में कमी लाई जा सकती है। दस्त रोग विकासशील देशों में अधिक व्यापक रूप से मौजूद है। जिसका मुख्य कारण दूषित पेयजल, स्वच्छता एवं शौचालय का अभाव तथा 05 वर्ष तक के बच्चों का कुपोषित होना है। नोडल एसीएमओ डॉ. आरवी सिंह ने बताया कि इस अभियान के तहत बाल्यावस्था में दस्त के दौरान ओआरएस एवं जिंक के उपयोग के प्रति जागरूकता को बढ़ाया देना है। पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दस्त के प्रबंधन एवं उपचार के लिए गतिविधियों को बढ़ावा देना साथ ही उच्च प्राथमिकता व अति संवेदनशील समुदायों में जागरूकता प्रदान करना है।सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा (आईडीसीएफ) एक से 15 जून तक चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत समस्त ऐसे परिवार जिनमें 05 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हों, कुपोषित बच्चे वाले परिवार, खाना बदोश, ईंटभट्ठों पर कार्यरत मजदूर परिवारों को शामिल किया जाएगा।
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