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पौने सात लाख किताबें ही बंट सकीं

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मऊ। शिक्षा सत्र का पांच माह बीत गया, लेकिन सरकारी स्कूलों में अभी तक बच्चों के लिए शत प्रतिशत मुफ्त किताबें नहीं आ सकी हैं। करीब 15 लाख में से अभी तक पौने सात लाख ही किताबें आ सकी हैं। ऐसे में बच्चों को किताबें नहीं मिलने से पठन-पाठन में दिक्कतें आ रही हैं। जिले में 1208 परिषदीय विद्यालय, 94 सहायता प्राप्त विद्यालय, समाज कल्याण से 56 विद्यालयों में 1.80 लाख बच्चे अध्ययनरत हैं। शासन की तरफ से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को नि:शुल्क किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। जिले में 1409294 किताबों के मुकाबले महज 608085 पाठ्यपुस्तकों का वितरण हो सका है। पाठ्यपुस्तकों के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो प्राथमिक स्तर की 20 किताबों के मुकाबले 10 किताबों का ही वितरण हो पाया है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 33 किताबों के मुकाबले 18 ही आ पाई हैं। इंगलिश मीडियम उच्च प्राथमिक विद्यालय की 22 के मुकाबले आठ पाठ्यपुस्तकों का वितरण हो पाया है। जबकि इंगलिश मीडियम प्राथमिक स्तर की एक भी किताब नहीं आ पाई है। बढुआगोदाम: क्षेत्र के कहिनौर, बढुआगोदाम, बहरीपुर, नसीरपुर सहित सहित विभिन्न इलाकों के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को अभी तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। अभिभावक संजीव यादव, घनश्याम सिंह, श्रीकांत वर्मा का कहना है कि बच्चों को परेशानी हो रही हे। बीएसए डॉ. संतोष कुमार सिंह ने बताया कि मुफ्त किताबों का वितरण विद्यालयों में कराया गया है। किताबों की खेप आ रही है। सत्यापन के बाद बीआरसी भेजा जाएगा। इस मामले मेें खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है।
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