मऊ। जिले में बिना पंजीकरण के पैथोलॉजी सेंटर बड़ी संख्या में धड़ल्ले से चल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में मात्र 80 पैथोलॉजी केंद्रों का ही पंजीकरण है। वहीं 150 से अधिक पैथोलॉजी सेंटर बिना पंजीकरण के ही चल रहे हैं।
नगर सहित जिले में जगह-जगह पर पैथोलॉजी केंद्र खुल गए हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग में यह आंकड़ा सैकड़ा से भी कम है, जबकि संचालित डेढ़ सौ से ज्यादा हो रहे हैं। बिना मानक के चलने वाले सेंटर बेखौफ होकर मरीजों की गैर अधीकृत जांच कर रहे हैं। आलम यह है कि अनेक चिकित्सक भी ऐसे सेंटर पर जांच कराने के लिए मरीजों को भेज रहे हैं, क्योंकि यहां उनका कमीशन तय है। दूसरी तरफ विभाग का दावा है कि टीम की ओर से नियमित रूप से ऐसे सेंटर की जांच की जाती है। गलत पाए जाने पर कार्रवाई भी होती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद में 80 पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं। जिसमें 57 पैथोलॉजी सेंटर जनपद के पंजीकृत अस्पतालों में हैं। वहीं बाहर में चलने वाले पंजीकृत पैथोलॉजी सेंटर की संख्या 23 है। जबकि वास्तविकता यह है जनपद मुख्यालय के साथ अनेक क्षेत्रों में गैर अधीकृत डेढ़ सौ से अधिक पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं। विभाग का कहना है कि किसी भी पैथोलॉजी सेंटर के पंजीकरण के लिए पैथोलॉजिस्ट के साथ डीएमएलटी के प्रमाण पत्र को विभाग के पास जमा करना होता है। विभाग सभी प्रमाण पत्रों की जांच के बाद भौतिक निरीक्षण कर लाइसेंस जारी करते हैं। ऐसे सेंटर की जांच के लिए नोडल के साथ सीएचसीवार भी टीम बनाई गई है। संबंधित क्षेत्र के सीएचसी प्रभारी की ओर से भी जांच की जाती है।
छह माह पहले गैर पंजीकृत 13 पैथोलॉजी सेंटर को बंद कराया
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि करीब छह माह पहले जनपद में अभियान चलाकर जांच की गई थी। इसमें शहरी क्षेत्र में आठ और दूर दराज क्षेत्र में पांच सहित 13 पैथोलॉजी सेंटर गैर पंजीकृत मिले थे। सभी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बंद कर दिया गया।
-
कैसे होता है पंजीकरण का खेल
मऊ। किसी भी पैथोलॉजी का पंजीकरण के लिए पैथोलॉजिस्ट के साथ डीएमएलटी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। लेकिन विभाग के सूत्रों का कहना है कि एक पैथोलॉजिस्ट के नाम पर कई सेंटर्स का पंजीकरण हो जाता है। लेकिन उसको डीएमएलटी के द्वारा ही संचालित किया जा रहा है। कहीं तो कुछ ऐसे सेंटर हैं जहां बिना डीएमएलटी की ओर से भी जांच कराई जाती है। इतना ही नहीं कई सेंटरों पर जांच करने वाले भी गैर अनुभवी कर्मचारी हैं।
कोट
पैथोलॉजी को लेकर समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। इसको लेकर टीम भी गठित की गई है, जो कि शिकायत के आधार पर पैथोलॉजी सेंटर की जांच करती है। अवैध पाए जाने पर कार्रवाई भी होती है।
डॉ. आरएन सिंह, एसीएमओ