कोपागंज। स्थानीय नगर पंचायत स्थित ओडियाना गल्ला मंडी उपेक्षा का शिकार है। कभी यह मंडी जिले के अलावा अन्य जिलों में व्यापार के लिए मशहूर था। दूर दूर के लोग इस मंडी में आकर व्यापार करते थे। लेकिन समय के साथ और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते अनेक समस्याओं से जूझ रहा है।
कोपागंज के ओड़ियाना गल्ला मंडी की स्थापना करीब डेढ़ सौ वर्ष पुरानी है। गल्ला मंडी की पहचान आसपास ही नहीं आस पास के जनपदों से लेकर महनगारों तक में भी विख्यात थी। रविवार बुधवार शुक्रवार को लगने वाले साप्ताहिक मंडी में हजारों किसानों व व्यापारियों का जमावड़ा होता था। लेकिन समय बीतने के साथ मंडी अनेक समस्याओं से जूझती गई। मंडी में बैठने के लिए कोई चबूतरा अथवा बेंच नहीं बना है। मंडी में छायादार चबूतरा नहीं है। बारिश हो या चिलचिलाती धूप तिरपाल से ढक कर मंडी में बिक्री होती है। मंडी में किसानों व्यापारियों के लिए मात्र एक सरकारी हैंडपंप है। लेकिन नगर पंचायत द्वारा लगाया गया वाटरकूलर चार वर्ष पूर्व लगा लेकिन लगने के एक वर्ष बाद खराब हो गया। फिर उसे ठीक कराने की कोशिश नहीं की गई। लावारिस हालत में पड़ा है। मंडी में जाने के लिए मुख्य सड़क पर वाहनों के जाम लगने से गल्ला मंडी और चौपट हो गई है। समय के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी गल्ला मंडी की पहचान और किसानों व्यापारियों के अनाजों के क्रय विक्रय के दौरान होने वाली समस्याओं को देखते हुए ओडियाना गल्ला मंडी में आने वाले किसान व्यापारी आप दूसरे गल्ला मंडी की ओर रूख करने लगे। दूसरी तरफ गल्ला मंडी की भू स्वामित्व जमीदारी प्रथा में होने से मंडी की दशा और खराब हो गई। लोगों का कहना है कि उपेक्षा का यही हाल रहा तो आने वाले कुछ सालों में ओडियाना की गल्ला मंडी की पहचान सिर्फ अतीत के पन्नों में सिमट कर रह जाएगा।