जिले में सड़क हादसों का ग्राफ हर साल 20 फीसदी बढ़ रहा है। इसके चलते इस साल छह नई जगहों को ब्लैक स्पॉट में शामिल किया गया है। इसके साथ ही यह संख्या 30 हो गई है।
बीते वर्ष भी 11 जगहों को ब्लैक स्पॉट में शामिल किया गया था। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि इनमें से 30 फीसदी ब्लैक स्पॉट पर वाहन चालकों की सजगता के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। सड़क किनारे की सफेद पट्टी और जेब्रा क्रॉसिंग के निशान भी धुंधले हो गए हैं।
बापू इंटर कॉलेज, कसारा मोड़, अहिरानी पेट्रोल पंप, बढुआगोदाम, सोनाडीह के पास सतर्कता के इंतजाम नहीं हैं। सबसे ज्यादा हादसे दो पहिया वाहनों की टक्कर के हैं। इसमें मौत का कारण अधिकांशत: सिर में चोट लगना है।
घटना के समय तेज रफ्तार, हेलमेट न पहनना, आगे निकलने की होड़ में नियम को दरकिनार कर ओवरटेक करना भी हादसों में मौत होने का बड़ा कारण है। इस साल सड़क हादसों मेंं बढ़ोतरी के चलते जिले में छह नए ब्लैक स्पॉट बनाए गए हैं। बीते साल ब्लैक स्पॉट की संख्या 24 थी। अधिकारियों की मुताबिक, हादसों पर ब्रेक लगाने को लेकर नए दुर्घटना आशंकित ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों को नए सिरे से चिह्नित किए जाने के साथ ही प्रमुख मार्ग पर सड़क सुरक्षा से जुड़े संकेतक लगवाने, स्पीड ब्रेकर बनवाने, रिफ्लेक्टिंग, रम्बलिंग स्ट्रिप बनाने तथा मार्गों के मोड़ पर डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर टेप लगाने का काम भी किया गया है।
दो से 16 अक्तूबर तक सड़क सुरक्षा पखवाड़ा चलाया जा रहा है। लेकिन स्पीडोमीटर से केवल सितंबर माह में ही वाहनों की जांच हुई। नशे में वाहन चलाने वालों की जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। कुछ ही दिन में कोहरा पड़ने लगेगा लेकिन अब तक सड़क किनारे की सफेद पट्टी और जेब्रा क्रासिंग के निशान ठीक करवाने की कोई पहल नहीं हुई है।
फोरलेन पर चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर संकेतक आदि लगाने की जिम्मेदारी एनएचएआई की है। साथ ही डीह तिलक ठाकुर और हलधरपुर के बीच चिह्नित करने की जिम्मेदारी लोक निर्माण खंड की है। प्रांतीय खंड में चिह्नित सभी ब्लैक स्पॉट के पास संकेतक सहित सभी इंतजाम किए गए हैं। - चक्रेश केन, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण प्रांतीय खंड