पहले दिन मात्र 539 लोगों ने लगवाई बूस्टर डोज
सदर में 115 लाभार्थियों को लगी बूस्टर डोज, रानीपुर रहा फिसड्डी
जिला अस्पताल तथा दस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क लगी बूस्टर डोज
छह लाख से अधिक लोगों को लगनी है बूस्टर डोज
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संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ। जिले में कोरोना संक्रमण का बढ़ते ग्राफ के बाद भी लोगों में बूस्टर डोज को लेकर कोई जागरूकता नहीं दिख रही है। केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार से 18 वर्ष से 59 वर्ष के लाभार्थियों के लिए भी निशुल्क बूस्टर डोज लगनी शुरू हुई है। पहले दिन दस केंद्रों पर महज 539 लाभार्थी पहुंचे जबकि जिले में छह लाख से अधिक लोग है जिन्हें बूस्टर डोज लगनी है। जिला अस्पताल में पहले दिन 115 लाभार्थियों ने बूस्टर डोज लगवाई। वहीं सबसे कम रानीपुर सीएचसी में केवल 22 लाभार्थियों ने बूस्टर डोज ली।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. बीके यादव ने बताया कि शासन के आदेश पर शुक्रवार से जिला अस्पताल तथा सभी दसों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 18-59 साल के उम्र के लोगों को नि:शुल्क बूस्टर डोज लगना शुरू हुआ है। पहले दिन 539 लाभार्थियों ने बूस्टर डोज लगवाई। बीते बृहस्पतिवार तक केवल 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को ही नि:शुल्क में बूस्टर डोज लगाई जा रही थी। जिला अस्पताल में सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक 115 लाभार्थियों ने बूस्टर डोज ली। इसीक्रम में दोहरीघाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 100 जबकि बड़राव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 33 लाभार्थियों ने टीका लगवाया। फतेहपुर मंडाव में 95 जबकि घोसी में 33, कोपागंज में 32, मुहम्मदबाद गोहना में 32, परदहा में 37 और रानीपुर में 22 जबकि रतनपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 37 लाभार्थियों को बूस्टर डोज लगाई गई।
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जागरूकता व प्रचार-प्रसार की कमी भी बनी वजह
मऊ। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की 25 लाख की आबादी के सापेक्ष 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के 16 लाख 62 हजार के सापेक्ष 17 लाख से अधिक लोगों को टीके की पहली तो 15 लाख से ज्यादा लोगों को टीके की दोनों डोज लगाई जा चुकी है। इसमें करीब छह लाख से ज्यादा ऐसे लाभार्थी है जिन्हें दोनों टीके की डोज लिए हुए नौ माह से ज्यादा का समय हो चुका है। बावजूद बृहस्पतिवार तक इसमें महज 33 हजार 802 लाभार्थियों ने बूस्टर डोज ली थी। वहीं शुक्रवार को निशुल्क होने के बाद भी केवल 539 लाभार्थी ही बूस्टर डोज लगवाने पहुंचे। कहा जा रहा है कि जागरूकता तथा प्रचार-प्रसार की कमी से भी लोग केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं।