मुहम्मदाबाद गोहना। लगभग 45 साल का लंबा समय और 11 बार विधानसभा का चुनाव अब तक हो चुका है। लेकिन मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा अजीब इत्तेफाक जुड़ा है कि यहां से जीतने वाला कोई भी प्रत्याशी लगातार दूसरी बार विधायक नही बन सका है। 1977 में जनता पार्टी की सरकार में शिवप्रसाद यहां से विधायक चुने गए लेकिन 1980 में हुए चुनाव में यह सिलसिला टूट गया। इस बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कामरेड तपेश्वर राम चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1985 में चुनाव हुआ। तपेश्वर राम चुनाव मैदान में रहे लेकिन दोबारा जीत हासिल नही हुई। इस बार कांग्रेस के राम बदन ने बाजी मारी और विधायक चुने गए। इसके बाद प्रदेश में उथल-पुथल के बीच 1989 में फिर चुनाव हुआ तो इस बार जीत की बाजी बहुजन समाज पार्टी के फौजदार प्रसाद के हाथ लगी और वह पहली बार विधायक बने। राजनैतिक घटनाओं के कारण मात्र दो साल बाद ही 1991 में विधानसभा चुनाव हुए। इस बार भाजपा के श्रीराम सोनकर जीते। फौजदार दूसरी बार अपनी जीत कायम नहीं रख सके। फिर 1993 में चुनाव हुआ श्रीराम सोनकर जीत का रिकार्ड नही बना सके। इस बार फिर से बाजी बसपा के फौजदार प्रसाद के हाथ लगी। 1996 में प्रदेश में विधान सभा चुनाव की नौबत आई लेकिन यहां से जुड़ा यह संयोग मिथ्या नहीं साबित हुआ। फौजदार प्रसाद विधायक नहीं बन सके। बल्कि भाजपा के श्रीराम सोनकर ने एक अंतराल के बाद फिर से जीते। पांच साल बाद 2002 में आम चुनाव हुआ। इस बार सपा के बैजनाथ पासवान विधायक बने। 2007 में भी किसी के लगातार विधायक बनने का रिकार्ड नही टूटा। इस में बसपा के राजेंद्र कुमार ने जीत दर्ज की। पांच साल बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा के बैजनाथ पासवान ने राजेन्द्र कुमार को पटखनी देकर उनके दूसरी बार विधायक बनने पर रोक लगा दी। 2017 में निवर्तमान विधायक बैजनाथ पासवान चुनाव मैदान में थे लेकिन इस बार उन्हें भी लगातार दूसरी जीत नसीब नहीं हुई। और भाजपा के श्रीराम सोनकर यहां से निवर्तमान विधायक हैं। 2022 में अब एक बार चुनाव हो रहा है इस बार भी भाजपा के श्रीराम सोनकर प्रत्याशी हैं। देखना है कि क्या इस बार भाजपा के श्री राम सोनकर लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर इस अनचाहे रिकॉर्ड या मिथ्या को तोड़ पाते हैं या फिर यह रिकार्ड यू ही बना रहता है।