मऊ। जिला अस्पताल में 60 लाख रुपये की लागत से आक्सीजन प्लांट बनने के एक वर्ष बाद भी चालू नहीं सका है। प्लांट की क्षमता करीब दस हजार लीटर है। इससे अस्पताल के सभी वार्डों के 80 बेड को आक्सीजन पाइप लाइन से जोड़ने की कवायद परवान नहीं चढ़ पा रही है। ऐसे में आक्सीजन प्लांट बनने के बाद भी सिलेंडर पर निर्भरता बनी हुई है। कोरोना काल की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए पिछले वर्ष दिसंबर माह में जिला अस्पताल में 60 लाख रुपये की लागत से लिक्विड मेडिकल आक्सीजन प्लांट लगा था। इसके लिए दो चरण में कार्य पूरा करने के लिए कुल 60 लाख रुपये धन आवंटित भी किया गया। दावा था कि 28 लाख रुपये से प्लांट की सतह का तैयार किया जाएगा। जबकि शेष 32 लाख रुपये से प्लांट के सभी संयंत्र लगाए जाने थे। प्लांट की क्षमता दस हजार किलो लीटर बनाने की कवायद थी। आक्सीजन प्लांट का फाउंडेशन तैयार कर आगरा की गनेश ट्रेडिंग कंपनी को प्लांट का शेष काम पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई थी। अस्पताल प्रशासन का कहना था कि दस हजार लीटर वाले इस प्लांट में टैंक द्वारा गैस भरी जाएगी। फिर उसी प्लांट से पाइप लाइन द्वारा अस्पताल के आकस्मिक, पीकू, बर्न, डायलसिस आदि अनुभाग में लगे बेड को पाइप लाइन द्वारा जोड़ सप्लाई की जाएगी। एक वर्ष पहले सभी काम को पूरा करने के बाद भी अभी तक इसका ट्रायल पूरा नहीं हो सका है।