जिला अस्पताल में वर्षो से बदहाल बना भवन।संवाद
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मऊ। जिला अस्पताल परिसर में पिछले वर्ष लाखों की लागत से बने भवन का साढ़े पांच साल से इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। कैंपस में 10 वर्ष पूर्व 50 लाख की लागत से बने आईसीयू में न तो उपकरण आ सके और न ही स्टाफ की तैनाती हो सकी। ऐसे में यह पूरी तरह अर्थहीन रह गया। गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जबकि आला अधिकारी संसाधनों का रोना रोकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के ठीक पीछे 2016 में लाखों की लागत से भवन का निर्माण कराया गया। लेकिन साढ़े पांच साल बाद भी भवन का उपयोग नहीं किया जा सका है। सूत्रों की मानें तो तत्कालीन सीएमएस डॉ. बृज कुमार की तरफ से पुराने भवन को आपदा प्रबंधन वार्ड के रुप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। भवन में 24 बेड, फायर फाइटिंग सिस्टम, नर्सिंग रूम की कवायद चल रही थी। इस वार्ड में भी सामान्य वार्ड की तरह ही सभी सुविधाएं बहाल होनी थी, लेकिन मानव संसाधन सहित अन्य स्टाफ के उपलब्ध न होने से योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। लाखों की लागत से बना भवन बेकार साबित हो रहा है। जिला अस्पताल कैंपस में 2012 में 50 लाख की लागत से गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) स्थापित किया गया लेकिन 10 वर्ष से यह बंद चल रहा है। दशक का समय बीत जाने के बाद भी विभाग से प्रशिक्षित चिकित्सक तथा कार्डियोलॉलिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। इसकी वजह से मरीजों को आईसीयू का लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में आईसीयू बंद रहने से सड़क दुर्घटना या दूसरे गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल में लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद बीएचयू रेफर कर दिया जा रहा है। वर्तमान समय में यह भी भवन अनुपयोगी साबित हो रहा है। सीएमएस डॉ. नाहिदा खातून सिद्दीकी ने बताया कि चिकित्सकों की कमी से समस्या आ रही है। तकनीकी स्टाफ की कमी से आईसीयू को शुरू नहीं किया जा सका है। शासन को पत्र भेजा गया है।