मऊ। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर सवारियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली आसानी से देखी जा सकती है। इन पर समान लदा होने के बाद भी लोग बैठने से बाज नहीं आ रहे। ट्राली के साइड में लिखा तो होता है कि कृषि उपयोग हेतु लेकिन इस्तेमाल लोगों को ढोने के लिए हो रहा है। कानपुर में हुए हादसे और शासन से ऐसी ट्रालियों को जांच के बाद 10 का जुर्मान लगाने को लेकर प्रशासन भी सक्रिय हो गया। अधिकारी जिले में दशहरे बाद अभियान चलाने की बात कर रहे हैं। नगर क्षेत्र के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में धड़ल्ले से ट्रैक्टर ट्राली का उपयोग अनाज, लोहा, सीमेंट आदि लाने के लिए किया जाता है। इनमें अधिकांश का पंजीयन कृषि उपयोग के लिए होता है। वर्तमान में परिवहन विभाग में पंजीकृत ट्रैक्ट्ररों की संख्या 16 हजार 321 है। जिसमें महज 30 वाहनों का कामर्शियल में पंजीयन है। बाकी का कृषि उपयोग के लिए। ग्रामीण क्षेत्रों में इन माल वाहक वाहनों में सिर्फ निर्माण सामग्री को ढोने की छूट दी जाती है, लेकिन इन वाहनों का उपयोग लोग अब यात्रा के लिए भी करने लगे हैं। हाल ही में कानपुर जिले में ट्रैक्टर ट्राली हादसे के बाद शासन प्रशासन सख्त हो गया है। परिवहन निगम तथा यातायात विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। ट्रैक्टर ट्रॉली, डंपर से सवारियां ढोने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दशहरा बाद विशेष अभियान चलाया जाएगा। अधिकारियों की माने तो ट्रैक्टर ट्राली और ट्रक में यात्रा करना प्रतिबंधित कर दिया गया है। एआरटीओ रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि ट्रैक्टर ट्रॉली, डंपर से सवारियां ढोने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। दशहरा बाद टीम गठित कर कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने लोगों से की कि यात्रा के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली या ट्रक का उपयोग न करें।