मऊ। तमसा को स्वच्छ बनाने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए अब तक जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। वर्ष 2019 में एनजीटी की टीम ने निरीक्षण के दौरान इसको लेकर नाराजगी जताई थी। हालांकि, अब एक बार फिर से नगरपालिका ने जमीन के लिए सर्वे शुरू किया है। नदी को प्रदूषित होने बचाने के लिए बायो रेमिडेशन तकनीक का सहारा लेकर पानी फिल्टर होने के बाद ही नदी में गिराया जा रहा है।
शहर का सीवर तमसा नदी में गिरता है। नालों के मुहाने पर बायो रेमिडेशन तकनीक से पानी को फिल्टर करने के बाद नदी में गिराया जाता है। वर्ष 2019 में एनजीटी की टीम ने तमसा नदी के साथ नगर पालिका क्षेत्र का निरीक्षण किया था। इस दौरान नदी के पानी का नमूना लेने के बाद जिला प्रशासन को गाइडलाइन जारी की थी। नगर क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे नदी में गिरने से रोकने के लिए कहा था। इसके लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर पानी को साफ करने के बाद ही नदी में गिराने के लिए कहा गया था।
एनजीटी के निर्देश पर तत्कालीन डीएम ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने इस कार्य की जिम्मेदारी जल निगम के साथ नगर पालिका को सौंपी थी। उधर, कार्यदायी संस्था जल निगम ने अपने हिस्से का कार्य पूरा कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया। लेकिन नगर पालिका की ओर से प्लांट के लिए जमीन चिह्नित नहीं की जा सकी। अब तीन साल बाद नगरपालिका प्रशासन ने फिर से प्लांट के लिए जमीन चिह्नित करने के लिए सर्वे शुरू किया है।
किसानों को मिलेगा फायदा:
मऊ। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगने से नगर क्षेत्र के 42 वार्डों से निकलने वाली गंदगी को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए शोधित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद निकलने वाला कचरा, खाद के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। पानी को सिंचाई के कार्य में लाया जा सकेगा। परियोजना से तमसा नदी जहां स्वच्छ होगी, वहीं नगर पालिका क्षेत्र के आसपास रहने वाले किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ ही खाद भी उपलब्धता होगी। इससे नगर पालिका का राजस्व भी बढ़ेगा।
कोट
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जल निगम की ओर से जमीन के लिए सर्वे प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। एक-दो जगहों पर जमीन देखी गई है। -दिनेश कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका