केंद्र सरकार की ओर से वक्फ बोर्ड के संशोधन विधेयक का बिल पेश कर दिया है। इससे वक्फ बोर्ड की संपत्तियां एक बार फिर चर्चा में है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग संपत्तियाें को खंगालने में जुट गया है। वर्तमान में विभाग के पास शिया और सुन्नी के 1600 से ज्यादा संपत्ति पंजीकृत है। लेकिन अगर इनकी सही जांच हो तो यह संख्या और भी बढ़ गई होगी।
दरअसल, परिसंपत्तियों का सर्वे कर वक्फ में पंजीकृत किया गया था। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी साहित्य निकष सिंह ने बताया कि जिले के चारों तहसील सदर, मधुबन, घोसी, मुहम्मदाबाद गोहना में सुन्नी वक्फ बोर्ड का 1594 तो शिया वक्फ बोर्ड के 36 संपत्तियां पंजीकृत की गई थीं, इनमें मस्जिद, मजार, कब्रिस्तान, इमामबाड़ा, इमाम चौक, कुछ जगहों पर दुकान आदि शामिल हैं। इन संपत्तियों का कुछ जगहों पर देखभाल न होने पर अवैध कब्जे हुए तो कहीं विवाद सामने आए। कुछ साल पूर्व प्रदेश सरकार ने वक्फ में दर्ज संपत्तियों का सर्वे करा रही थी, लेकिन किन्हीं कारणों से मामला रुक गया। इससे नई संपत्तियों का वक्फ में पंजीयन भी नहीं हो सका। अब केंद्र सरकार की ओर से संशोधन विधेयक बिल पेश करने के बाद चहलकदमी बढ़ गई है। अल्पसंख्यक विभाग वक्फ संपत्ति को खंगालने में जुट गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने बताया कि वक्फ परिसंपत्तियों को लेकर बोर्ड से जानकारी मांगी गई है।