दोहरीघाट के तटवर्ती इलाके में बाढ़ से बचाव के लिए नदी के किनारे वोल्डर डालकर बनाए जा रहे ठोकर।संव
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मऊ। मानसून नजदीक है। ऐसे में दो स्थानों पर चल रहा कटान प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं किया गया है। नदी में आने वाली बाढ़ से किसानों को भूमिहीन होने तथा कटान पीड़ितों को बेघर होने की आशंका सताने लगी है। बरसात में घाघरा हर साल दोहरीघाट तथा मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा में बड़े पैमाने पर तबाही मचाती है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से प्रतिवर्ष हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद होती है। दोहरीघाट में मुक्तिधाम को बचाने के लिए 11.79 करोड़ की लागत से कटान प्रोजेक्ट का कार्य चल रहा है। इसे सितंबर तक पूरा होना है। बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ जाने से प्रोजेक्ट का कार्य बाधित हो सकता है। ऐसे में नदी भारी तबाही मचा सकती है। मधुबन तहसील क्षेत्र के बिंदटोलिया सहित आसपास के गांवों को कटान से बचाने के लिए 12.34 करोड़ की लागत से नदी की धारा मोड़ने के लिए निर्माण कार्य डायवर्जन चैनलाइजेशन कार्य विभाग ने कागज में ही पूरा किया है। जबकि वास्तविकता हकीकत से परे है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धारा मोड़ने के लिए निर्माण कार्य आधा अधूरा ही छोड़ दिया गया है। कटान पीड़ित महेंद्र प्रसाद, रामानंद यादव, संजय प्रसाद ने बताया कि घाघरा प्रतिवर्ष दोहरीघाट तथा मधुबन क्षेत्र में तबाही मचाती है, लेकिन बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान ने बताया कि कटान प्रोजेक्ट पर कार्य चल रहा है। बिंदटोलिया गांव के पास नदी की धारा मोड़ने के लिए डायवर्जन चैनलाइजेशन कार्य संबंधित विभाग ने कागज पर ही पूरा किया है।