मधुबन। लोगों और अपनी जान खतरे में डाल कर स्थानीय नगर पंचायत सहित आसपास के मुख्य मार्गों पर नाबालिग ई-रिक्शा सवारी ढो रहे हैं। इसके चलते उसमें बैठे सवारी और सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जान खतरे में रहती है। ये नाबालिग कब कहां से ई-रिक्शा घुमा दें किसी नहीं पता होता है। यही कारण है कि मधुबन कस्बा में आए दिन कोई न कोई टकराकर घायल हो रहा है। आश्चर्य ये है कि इनपर लगाम लगाने वाली ट्रैफिक पुलिस की तैनाती मधुबन तहसील में नहीं है। स्थानीय पुलिस कभी कभी अभियान चलाती है, फिर कुछ दिन बाद नाबालिग सड़कों पर उतर जाते हैं। सबसे अधिक मधुबन से दुबारी, भैरोपुर, घोसी, दोहरीघाट, मझवारा, इब्राहिमपट्टी, मर्यादपुर, बेल्थरारोड जाने वाली सड़क पर इनकी संख्या अधिक है। बच्चों को ई-रिक्शा और ऑटो चलाते देख यात्री सहम जाते हैं, लेकिन गंतव्य तक जल्दी पहुंचने के लिए मजबूरन बैठना पड़ता है। इस संबंध में मधुबन थाना प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि नाबलिगों द्वारा वाहन चलाए जाने की जानकारी नहीं है। इनकी चेकिंग करना ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है। हालांकि चेकिंग अभियान चलाकर लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।