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अब नहीं जाना महानगर

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मुहम्मदाबाद गोहना। कोरोना कहर के चलते प्रवासी मजदूरों का अपने वतन व घर आने का सिलसिला जारी है। काफी जद्दोजहद, झंझावात और मुफलिसी का सामना कर रहे मजदूर किसी तरह घर पहुंचने के बाद अपनी जिंदगी की सलामती के लिए ऊपर वाले का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। साथ ही दोबारा महानगरों में जाने के नाम पर ना बाबा ना कहने में कोई गुरेज नही कर रहे। मजदूरों का कहना है कि अब अपने गांव व घर मे किसी प्रकार जीवन यापन कर लेंगे लेकिन अब बीते हुए दिनों की याद कर महानगरों के तरफ रुख करने के नाम पर ही पसीने छूट रहे हैं। मुंबई, अहमदाबाद, राजस्थान सहित विभिन्न महानगरों से जितनी जिल्लत, तकलीफ और दुख दर्द के साथ अपने घरों को लौटे हैं उसको याद करके ही रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील क्षेत्र के मंडहा गांव निवासी चंदन मुंबई में शटरिंग का काम करता था। लाकडाउन के बाद काम पूरी तरह बंद हो गया। जो कुछ पैसे बचे थे उससे काम चलता रहा लेकिन स्थिति खराब होने के बाद वह घर लौटना ही मुनासिब समझा। गांव के हरकेश का कहना है कि मुंबई की स्थिति काफी खराब है। मुंबई के बाहर वालों के साथ सौतेला व्यवहार के चलते वहां काफी तकलीफ उठानी पड़ी है। जिस फैक्ट्री में काम करता था वह पूरी तरह से बंद हो गई। कुछ दिनों तक किसी तरह जुगाड़ कर पेट भरता रहा लेकिन स्थिति असहनीय होने पर वह घर लौटना ही मुनासिब समझा। इसी प्रकार मंड़हा गांव निवासी स्वामीनाथ भी घर लौटने पर काफी खुश है। कहते हैं कि कोरोना त्रासदी के चलते मुंबई में जिंदगी पूरी तरह से ठहर गई है। खाने को लाले पड़ने के बाद किसी तरह से जुगाड़ कर अपने संसाधन से घर पहुंचा है। अब ऐसा महसूस हो रहा है जैसे ऊपर वाले ने नई जिंदगी बख्श दी है। इसी प्रकार उसी गांव के ही रहने वाले नीरज का कहना है कि अब यहां कोई भी काम कर कर लेगा लेकिन अब महानगरों के नाम पर रूह कांप रही है। कहा कि यहां पर छोटा-मोटा रोजगार, सब्जी व्यवसाय, किसानी आदि का काम कर अपना जीवन यापन करेंगे लेकिन अब शहरों में जाने के नाम पर ना बाबा ना।
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