मधुबन बीआरसी पर दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आयोजित प्रशिक्षण कार्य?
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मधुबन। बेसिक शिक्षा विभाग ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया। जिसमें दिव्यांग बच्चों को चिह्नित करने के लिए आंगनबाड़ी को स्क्रीनिंग का तरीका बताया गया। प्रशिक्षण चार बैच में पूरा होगा। बीआरसी के सभागार में स्पेशल एजूकेटर विजय बहादुर व बंधु ने बताया कि अब से पहले छह से 14 वर्ष तक के बच्चों का डाटा रहता था। अब तीन से पांच वर्ष तक के बच्चों का डाटा भी एकत्र करना होगा। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार यह अभियान चला रही है। आंगनबाड़ी के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की पहचान कर उनके लिए आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। स्पेशल एजूकेटर विजय कुमार ने कहा कि दिव्यांगता का पता लगने पर उसके बचाव एवं व्यवस्थापन का कार्य किया जा सकता है, इसीलिए यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है। स्पेशल एजूकेटर संगीता मौर्या ने कहा कि प्रत्येक ब्लाक पर प्रशिक्षण देने के लिए एक ब्लाक से तीन मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षण दिया गया है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चों में शारीरिक बाधाओं वाले बच्चों का अधिक से अधिक चिन्हांकन किया जाएगा। प्रशिक्षण में एआरपी रणंजय मल्ल, रेहाना खातून, शैल कुमारी, नीतू गुप्ता, देवंती देवी, शकुंतला देवी, सविता सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रहीं। घोसी : मझारामोड स्थित ब्लॉक संसाधन केंद्र के सभागार में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 3 से 6 वर्ष तक विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों के चिन्हांकन एवं स्क्रीनिंग हेतु प्रशिक्षण दिया गया।