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प्रधानों ने बयां की पीड़ा

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मऊ। पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के जनपदीय संचालन समिति की बैठक लॉक डाउन को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ घोसी ब्लाक मुख्यालय के सभा कक्ष में जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव की अध्यक्षता में रविवार को हुई। बैठक में प्रधानों ने कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक का संचालन करते हुए जिला महासचिव रामभवन प्रसाद ने कहा कि जनपद के ग्राम सहरोज के प्रधान के परिजनों एवं रघौली प्रधान के साथ हुई घटना ने यह साबित कर दिया है कि योगी सरकार के शासन में ग्राम प्रधान सुरक्षित नहीं हैं। प्रधानों ने इस बात पर चिंता जताया कि विपक्ष के स्थानीय निकाय के एमएलसी ही प्रधानों का हालचाल लेते हैं। कहा कि कोरोना संकट में पुलिस की कार्यप्रणाली सराहनीय रही है। मंडल उपाध्यक्ष श्रीधर राय ने सरकार से मांग किया कि कोरोना वायरस महामारी संकट में महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, पंजाब आदि से भारी संख्या में गांवों में लोग आ रहे हैं , इन्हें लेकर ग्राम प्रधानों के समक्ष कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जा रही हैं। उन्होंने इस संघर्ष में सरकार से ग्राम पंचायतों को आर्थिक मजबूती प्रदान करने की मांग की। समिति के घोसी ब्लाक अध्यक्ष हरिकेश यादव ने पंचायत चुनाव को छ महीने टालने की मांग किया। अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष विवेकानंद यादव ने भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार चौदहवां वित्त आयोग की निष्पादित अनुदान परफार्मेंस ग्रांट वर्ष 2016-17 की सात करोड़ रुपये को शासनादेश की अनदेखी कर उप्र सरकार द्वारा केवल 73 ग्राम पंचायतों में वितरित कर देने को दुर्भाग्य पूर्ण बताया। सवाल किया कि वह कौन-सी पद्धति जांच करने की है जिसमें 59000 ग्राम पंचायतों में से केवल 73 ग्राम पंचायतें ही पात्र पाई गईं। उन्होंने ग्रांट वितरण में भारी अनियमता का आरोप लगाते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश शर्मा एवं प्रदेश प्रभारी रविन्द्र राय से मांग किया कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। बैठक में संतोष सिंह, जमानत अब्बास, संजय सिंह, राधेश्याम मौर्य आदि लोग ग्राम प्रधान रहे।
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