जिला महिला अस्पताल में एक्सपायर हो गया गर्भवस्था में लगने वाला इंजेक्शन एंटी डे।
- फोटो : MAU
मऊ। सरकारी अस्पतालों में ऐसे तो आए दिन दवाओं के न होने से मरीज-चिकित्सकों के बीच विवाद होने की घटनाएं होती रहती है। लेकिन जिला महिला अस्पताल में दूसरा मामला ही प्रकाश में आया है। गर्भावस्था के दौरान लगने वाला एंटी-डी इंजेक्शन का बड़ा स्टॉक प्रयोग न होने से एक्सपायर हो गया। चौकाने वाली बात है कि इस दौरान कई मरीजों को इस इंजेक्शन की जरुरत पड़ी, लेकिन चिकित्सकों ने अपनी कमीशनखोरी के चलते इंजेक्शन को अस्पताल से लगवाने के बजाए बाहर से मंगवाया। फलस्वरूप अस्पताल के स्टोर में रखा एंटीडे इजेक्शन एक्सपायर हो गया। एक्सपायर एक इजेक्शन की कीमत 2800 रुपये है, इस हिसाब से लाखों का इंजेक्शन प्रयोग न होने से खराब हो गया। गरीब तथा मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों के महिलाओं तथा गर्भवती महिलाओं के किफायती और बेहतर इलाज के लिए जिला महिला अस्पताल ही आखिरी उम्मीद का सहारा होता है। खासतौर पर जब यहां की सीएमएस खुद एक बड़ी प्रतिष्ठित गायनी विशेषज्ञ है। इसके अलावा सुविधा और संसाधनों से जिला महिला अस्पताल लबरेज है। यहां चार गायनी, एक संविदा मेडिकल अफसर, दो बेहोशी के डाक्टर, अत्याधुनिक ओटी और सर्व सुविधा संपन्न नवीन भवन है। इसके बाद भी अगर जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को बाहर से दवा लेना पड़े तो निश्चित रूप से अस्पताल प्रबंधन तथा चिकित्सकों की लापरवाही उजागर होती है। ऐसा नहीं है कि अस्पताल के स्टोर में दवाईंयों की कमी है, लेकिन सीएमएस को छोड़कर अधिकांश चिकित्सकों के बाहर से दवा लिखना आम है। बुधवार को अमर उजाला की जांच में एंटी-डे इंजेक्शन का एक स्टॉक एक्सपायर मिला था। यह इंजेक्शन 247 से अधिक हैं। कीमत की बात करे तो 2800 सौ रुपये का इंजेक्शन है, जो अस्पताल में नि:शुल्क लगता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में एंटीबायटिक दवाएं भी एक्सपायर हुई है।