जिला अस्पताल स्थित पोषण पुर्नवास केंद्र में खाड़ी पड़ा बेड।संवाद
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मऊ। जिले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या चार हजार है। जबकि इनके इलाज के लिए बनाया गया पोषण पुनर्वास केंद्र महज दिखावा साबित हो रहा है। ऐसे बच्चों को केंद्र और बाल पुष्टाहार विभाग चिह्नित कर इलाज की व्यवस्था कराता है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 10 बेड वाले पोषण पुनर्वास केंद्र में बीते तीन माह में महज छह बच्चे की भर्ती हो सके हैं। इनमें भी एक बच्चे के परिजन खुद जागरूकता दिखाते हुए पहुंचे। जिले में कुपोषित बच्चों की उचित देखभाल और उन्हें कुपोषण से उबारने के लिए जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र खोले गए हैं। लेकिन यह पोषण पुनर्वास केंद्र नाम मात्र के हैं। यहां अधिकारियों की अनदेखी अतिकुपोषित बच्चों पर भारी पड़ रही है। बाल पुष्टाहार विभाग की माने तो चार हजार से अधिक कुपोषित बच्चों की संख्या है लेकिन स्वास्थ्य विभाग तथा बाल पुष्टाहार विभाग का अमला इन बच्चों को जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र तक लाने में असफल साबित हो रहा है। हालात यह है कि जिला अस्पताल में बना दस बेड के पोषण पुनर्वास केंद्र में तीन माह में इसमें केवल सात ही बच्चें पोषण केंद्र तक पहुंच सके है। जबकि यह स्थिति उस समय है जब कुपोषण दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की नौ ब्लाकों में कार्य करनी वाली 18 राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के साथ बाल पुष्टाहार विभाग की 25 सौं से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुपोषित बच्चों को चिह्नित करने में जुटी हैं। उधर पोषण पुनर्वास केंद्र के आंकड़ों पर गौर करे तो वर्तमान में एक सप्ताह से केंद्र खाली चल रहा है। वहीं इस माह में दो कुपोषित मरीज अनन्या तथा परी भर्ती हुई है। वहीं बीते नवंबर माह में कोपागंज निवासी अन्नया तो अक्तूबर माह में तीन मरीज भर्ती हुए थे। इसमें भी एक मरीज को उसके परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उसे कुपोषित देखकर उसे केंद्र में भर्ती कराया था। सीएमओ डॉ. एसएन दुबे ने बताया कि अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें केंद्र तक पहुंचाने का कार्य आरबीएसके द्वारा बराबर किया जा रहा है। इसमें अगर किसी तरह से लापरवाही हो रही है तो इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।