अफसरों को धमकी देने का है। चार मार्च को विधानसभा चुनाव के दौरान सुभासपा प्रत्याशी अब्बास अंसारी ने छोटे भाई उमर के साथ पहाड़पुरा के मैदान में जनसभा के दौरान अधिकारियों को चेतावनी दी थी। अब्बास ने अखिलेश यादव का नाम लेकर कहा था कि भैया से बात हो गई है। सपा की सरकार बनने पर यहां के अधिकारियों का छह महीने तक ट्रांसफर नहीं होगा। पहले सभी का हिसाब-किताब होगा। इस मामले में अब्बास सहित तीन लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। सदर विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित होने के बाद पुलिस को इनकी तलाश थी।
अखिलेश से मिलने सैफई गए अब्बास अंसारी
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शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें विधायक अब्बास अंसारी, उनके भाई उमर अंसारी के अलावा मंसूर अंसारी सहित पांच नामजद व अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप है कि 10 मार्च को विधायक ने समर्थकों के साथ विजय जुलूस निकाला। इससे जाम लगने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई थी। इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना गया। कोर्ट से तीनों के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।
तीसरा मामला भी शहर कोतवाली क्षेत्र का है। आरोप है कि 27 फरवरी को सुभासपा उम्मीदवार अब्बास ने बिना अनुमति के राजाराम का पूरा से भरहू का पूरा की ओर बिना अनुमति भीड़ जुटा कर रोड शो किया था। इसमें अब्बास अंसारी और उनके समर्थकों के विरुद्ध चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का केस दर्ज हुआ था। कोर्ट से विधायक अब्बास अंसारी, भाई उमर अंसारी के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किया गया था।
कचहरी में रही गहमागहमी
सदर विधायक और उनके भाई के आत्मसमर्पण की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। कचहरी के मुख्य द्वार व आसपास सुरक्षा की व्यवस्था कर दी गई। इस दौरान शहर कोतवाल संजय उपाध्याय फोर्स के साथ कचहरी के मुख्य द्वार तथा परिसर में भ्रमण करते रहे। कचहरी परिसर में भी गहमागमही रही। सदर विधायक अब्बास अंसारी कचहरी परिसर में दोपहर 12:00 बजे पहुंचे इसके बाद वह 3:00 बजे कोर्ट परिसर से निकले।