नगर के हिन्दी भवन में हिन्दी साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद लोग।
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मऊ। हिंदी साहित्य परिषद के तत्वावधान में रविवार की देर शाम में हिंदी भवन के सभागार में हिंदी पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत विचार गोष्ठी और काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इसमें सर्वसम्मति से पं. श्याम नारायण पांडेय और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं को पुन: कोर्स में पढ़ाए जाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे समस्त साहित्यकारों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया। डीसीएसके पीजी कालेज के हिंदी विभागाध्यक्ष तथा मुख्य वक्ता डॉ. कंचन राय ने कहा कि आज हिंदी भाषा के उन्नति के लिए हमें समर्थ संकल्प लेने की जरूरत है। कवि, कलाकार, शिक्षक और मीडियाकर्मी सभी का यह दायित्व है कि हिंदी का सामर्थ्यवान बनाने का संकल्प लें। अध्यक्षता कर रहे डॉ. एसएन खत्री ने कहा कि हिंदी भाषा गंगा की तरह है, जिसमें सभी भाषाएं समाहित है। उन्होंने पं. श्याम नारायण पांडेय और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताओं को पुन: कोर्स में पढ़ाए जाने का प्रस्ताव रखा, जिसे साहित्यकारों ने सर्वसम्मति से अनुमोदित किया।। गोष्ठी में रामनिवास राय, मृत्युंजय तिवारी, जगन्नाथ सिंह, हरेराम सिंह ने भी अपेन विचार रखे। दूसरे सत्र में काव्य गोष्ठी की शुरुआत गिरजाशंकर तिवारी की वाणी वंदना से हुई। कवि डॉ. कमलेश राय ने हिंदी पखवाड़ा पर अपनी रचना स्नेह सुधा बरसाती है जो, तिल तिल जल दीप शिखा सी, नूतन ज्योति जगाती है ...पेश किया। इस मौके पर दयाशंकर तिवारी, मृत्युंजय तिवारी, रवीश कुमार, विशाल पांडेय ने भी काव्य पाठ किया। इस अवसर पर जन्मेजय सिंह, शेषनाथ राय, उर्मिला राय, सर्वाननंद, देवेश राय, सतानंद आदि मौजूद रहे।