दोहरीघाट कस्बा की रामलीला में लक्ष्मण द्वारा नाक काटने के बाद विलाप करती सूर्पणखा।
- फोटो : MAU
दोहरीघाट कस्बे में सूर्पणखा नासिका भंग, सीता हरण और जटायु मरण की लीला का हुआ मंचन
दोहरीघाट। कस्बे की रामलीला में जहां सूर्पणखा नासिका भंग, सीता हरण, जटायु मरण की लीला का मंचन किया गया। वहीं गोठा की रामलीला में सेतु बंधन लीला का मंचन किया गया। रामलीला में सूर्पणखा नासिका भंग के मंचन के दौरान जैसे ही लक्ष्मण ने सूर्पणखा का नाक काटा, वैसे पूरा पांडाल लखन लाल के जयकारे से गूंज उठा। रामलीला मंचन में सीता हरण के बाद भगवान राम राम वियोग में पशु पंछी से पूछते हैं कि ‘हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी तुम देखी सीता मृगनयनी’ कहकर विलाप करते हैं। रामविलाप के दृश्य पर दर्शकों की आंखें नम हो गई। गोठा में चल रही रामलीला में भगवान राम द्वारा रावण पर विजय हासिल करने के लिए समुद्र में सेतु बनाने की योजना बनायी जाती है। श्रीराम समुद्र से रास्ता मांगने की आराधना करते हैं। आराधना करते तीन दिन बीत जाने के बाद जब समुद्र रास्ता नहीं देता है तो श्रीराम लक्ष्मण से धनुष और बाण लाने को कहते है। जैसे ही श्रीराम धनुष की प्रत्यंचा पर बाण चढ़ाते है, समुद्र में उथल-पुथल मच जाती है। समुद्र देवता हाथ जोड़कर प्रकट होते ही दर्शकों द्वारा जयश्रीराम का जयकारा लगाते ही पंडाल गूंज उठा। श्रीराम से रक्षा की भीख मांगते हुए समुद्र बताते हैं कि उनकी सेना में नल और नील नाम के दो बंदर हैं। जिनको ऋषियों का श्राप मिला हुआ है कि वे जो सामान समुद्र में फेकेगें, वह तैरने लगेगा। इस प्रकार आप उनसे पत्थर फेंकवाकर सेतु का निर्माण कर सकते हैं। सेतु बनकर तैयार हो जाता है फिर राम जी लंका पहुंचते है । नगर की रामलीला के मुख्य अतिथि दारा सिंह चौहान के प्रतिनिधि शिवप्रकाश उपाध्याय सुब्बी बाबा रहे।