मुहम्मद रफी की पुण्यतिथि पर नगर के मलिकटोला स्थित राष्ट्रीय ललित कला प्रशिक्षण विकास संस्था के ?
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मऊ। राष्ट्रीय ललित कला प्रशिक्षण विकास परिषद के तत्वावधान में मलिक टोला स्थित संस्था के ट्रेनिंग हाल मे फिल्मी दुनिया के के बेताज बादशाह गायक मुहम्मद रफी की पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि रफी साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924 को लाहौर के पंजाब शहर मे हुआ। रफी के यादगार गीत चौदहवीं का चांद हो बाबुल की दवाएं लेती जा मुझको मेरे बाद जमाना ढुंढेगा बहुत से सदा बहार गीत गाए। 13 साल की उम्र मे सहगल साहब के एक प्रोग्राम मे रफी साहब ने पहला गाना गाया। धीरे-धीरे रफी साहब फेमस होते गए। मशहूर संगीत कार नोशाद ने फिल्म अनार कली मे गाने का अवसर दिया। मगर उसी दिन हिंदुस्तान पाकिस्तान का बंटवारा हो गया। रफी साहब की बीवी पाकिस्तान चली गई। रफी ने भारत में रहकर बिलकीस से दूसरी शादी की। ऱफी दो चीज के शौकीन थे। पतंगबाजी और उम्दालदीज खानो के। रफी साहब की जब मृत्यु 31 जुलाई 1989 मे हुई उस दिन आसमान भी खूब ऱोया था। भारी बारिश के बीच रफी साहब को सुपुर्दे खाक किया गया। मगर अफसोस कि इतने बडे महान गायक की कब्र के नामो निशान महाराष्ट्र सरकार ने मिटा दिया। इस अवसर पर लुबमा खान, मारिया इकबाल, सरिता, नाजरा, ज्योति मौया, प्रियंका भारती, उज्मा एरम, प्रांसु वर्मा, गौतमी सिंह, नेहा खरवार आदि उपस्थित रहे।