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अलम का निकला जुलूस

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घोसी के बड़ागांव में मंगलवार की रात्रि मोहर्रम के अवसर पर तकरीर करते शफगत तकी। - फोटो : MAU
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घोसी। नगर के बड़ा गांव में मंगलवार की देर रात अलम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान नौहा और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की गई। मौलना शफकत तकी के नौहों ने लोगों को दर्द से भर दिया। जुलूस अजाखाने जैनबिया से निकला और जाफरी मस्जिद से होता हुआ सदर बाजार स्थित इमाम चौक पर खत्म हुआ। सदर बाजार में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना शफकत तकी ने कहा कि हमारी कौम ने जुल्म आगे न कभी सर झुकाया है और न ही झुकाएगी। हम इमाम हुसैन के मानने वाले हैं जिन्होंने कर्बला के मैदान में जुल्म के आगे अपना सर नही झुकाया। नाना के दीन इस्लाम को बचाने के लिए सर कटा दिया। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन को कर्बला के मैदान में जब जवान बेटे अली अकबर की आवाज सुनाई दी कि बाबा मेरा आखिरी सलाम लीजिये इमाम की आंखों की बीनाई चली गयी। हुसैन कर्बला के मैदान में लाशों से टकराते हुए अली अकबर तक पहुंचे। अली अकबर ने कहा बाबा बरछी का फल सीने में टूट के रह गया है इमाम ने आस्तीन चढ़ाई और या अली कह के जो बरछी का फल खींचा बरछी के साथ अली अकबर का कलेजा निकल आया अली अकबर की रूह गुलशने जन्नत को परवाज कर गयी। मसायल सुनकर अजादार रो पड़े। इस अवसर पर मोहम्मद अली, उल्फत हुसैन, मारूफ, इफ्तेखार अब्बास, काजिमहुसैन, फ़ैयाज शब्बर, असगर नासरी, सलमान अख्तर, मोहम्मदतक़ी, अलीरजा, फरहत अब्बास सहित बड़ी संख्या में अजादार उपस्थित रहे।
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