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गोंड जाति के पांच प्रमाण पाए गए संदिग्ध

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कलेक्ट्रेट सभागार में समाज कल्याण विभाग की बैठक में गोंड जाति के आए मामलों के संबध में लोगों को स? - फोटो : MAU
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मऊ। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में गोंड़ जाति के लोगों को अनुसूचित जाति के प्रमाण जारी किए जाने का मामला छाया रहा। मुहम्मदाबाद गोहना और सदर तहसील क्षेत्र के पांच लोगों को जारी किए गए प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। डीएम ने दोनों तहसीलों के तहसीलदारों को बैठक में बुलाकर इन प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच करने को कहा। इसके अलावा मधुबन और घोसी तहसीलों के छह लोगों को जारी किए गए प्रमाणपत्र भी जांच के दायरे में हैं। इन पर 13 अगस्त को सुनवाई करने का निर्णय लिया गया। डीएम ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा कि गाइड लाइन की अनदेखी करके गोंड जाति को अनुसूचित जाति के लोगों को प्रमाण पत्र हासिल करने वालों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जनपद की चारों तहसीलों के कई गांवों के गोंड़ जाति के लोग अपने को अनुसूचित जाति का होने का दावा करते हुए प्रमाण पत्र की मांग करते हैं। इसके लिए कई बार धरना प्रदर्शन भी किया जा चुका है। इनमें आपत्तियां आईं तो लाभार्थियों को दावों के पक्ष में प्रमाणपत्रों के साथ बैठक में बुलाया गया था। बैठक में सुनवाई के दौरान मुुहम्मदाबाद गोहना और सदर तहसीलों के गोंड जाति के पांच लोगों को अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए। डीएम ने दोनों तहसीलों के तहसीलदारों से इन प्रमाणपत्रों की सत्यता के बारे में शासन की गाइड लाइन के अनुरूप उनकी वैधता के बारे में जानकारी देने को कहा। दोनों तहसीलदारों के अनुसार ये पांचों प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। बैठक में मधुबन और घोसी तहसीलों के गोंड़ जाति के छह लोगों को जारी प्रमाण पत्र भी जांच के दायरे में आ गए। इन प्रमाण पत्रों पर सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तिथि नियत की गई। इस संबंध में जिलाधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि गाइड लाइन की अनदेखी करके बनाए गए प्रमाणपत्रों में दोक्षी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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