मऊ। जनपद के विभिन्न इलाकों में दशकों पूर्व शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पानी की टंकियां खड़ी कर दी गईं, भूमिगत पेयजल पाइप का जाल भी बिछा दिया गया, लेकिन अब ये किसी काम की नहीं रह गई हैं। अधिकांश पानी टंकियों की निर्धारित 30 वर्ष की आयु भी करीब-करीब पूरी हो चुकी है।आए दिन तकनीकी खामियों के चलते यह रोजाना प्रदूषित पानी उगल रहे हैं जो अब लोगों के पीने के लायक नहीं हैं। जल निगम के अधिकारी भी शासन को प्रस्ताव भेजने की बात कहकर मामले में पल्ला झाड़ ले रहे हैं। जिले की करीब 25 लाख की आबादी को शुद्ध पेयजल मुहैैया कराने के लिए जलनिगम द्वारा जिले के सदर तहसील, मधुबन, मुहम्मदाबाद और घोसी तहसील के नौ ब्लॉकों में 15 ओवरहेड टैंक बनाए गए हैं। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो 1977-78 में कोपागंज ब्लॉक के 20 गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए विभाग द्वारा कसारा में ओवरहेड टैंक बनाया गया था। इसी तरह से 1974-75 में मधुबन में ओवरहेड टैंक बनाया गया था। जबकि 1974-75 में घोसी में, 1972-73 में दोहरीघाट ब्लॉक के गोठा में, वहीं मधुबन तहसील के दुबारी कस्बे में 1972-74 में ओवरहेड तथा रतनपुरा ब्लॉक के हलधरपुर में 1978-79 में और रतनपुरा ब्लॉक में 1978-79 में बनाया गया था। लेकिन इनमें अधिकांश ओवरहेड टैंक 30 साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो एक ओवरहेड टैंक की आयु 30 वर्ष तक होती है। ऐसे में अधिकांश ओवरहेड टैंक पुराने हो गए हैं। इनकी मरम्मत और सफाई के लिए लंबे अरसे कोई बजट भी नहीं आया है। लिहाजा, पानी टंकियों की हालत यह है कि कई के सरिया तक दिखाई देने लगे हैं और कई मरम्मत के अभाव में बदहाल हो चुके हैं। इससे पेयजल आपूर्ति बड़ी मुश्किलों से लोगों को विभाग द्वारा मुहैया कराया जा रहा है। इसके अलावा ओवरहेड टैंकों में लगे नलकूप 15 के सापेक्ष 30 साल से ज्यादा पुराने होने के चलते आए दिन खराब होने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है। यही स्थिति पाइप लाइनों की भी है, जो कि तीन दशक पुरानी हो चुकी है। समस्या के संबंध में उपभोक्ताओं द्वारा शिकायत निरंतर किया जाता है, लेकिन विभागीय अधिकारियों सब कुछ जानते हुए बजट की कमी के चलते मौन साधे रहते हैं।