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डाक्टरों की कमी इलाज में बन रही बाधक

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जिला महिला अस्पताल के इमरजेंसी गेट पर रविवार को कोई भी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं रहा। - फोटो : MAU
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मऊ। सरकारी अस्पताल में रविवार को मरीज भगवान भरोसे हो जाते हैं। अगर रविवार को वार्ड में भर्ती मरीजों को कोई समस्या हो जाए तो इलाज मिलना मुश्किल है। इसके पीछे दो कारण हैं, एक तो चिकित्सकों की भारी कमी और दूसरी तैनात चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों का मनमाना रवैया। रविवार को इस व्यवस्था के लिए अमर उजाला ने जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल सहित पांच सीएचसी में इस समस्या को जानने का प्रयास किया । इस दौरान कुछ अस्पतालों में चिकित्सक तैनात मिले तो कुछ में नदारद रहे। अस्पतालों में तैनात गार्ड तो ड्युटी पर कहीं नजर ही नहीं आए। दलाल अस्पतालों में दलाल बेधड़क में घूमते नजर आए। जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती कई मरीज दर्द से कराह रहे थे, कोई पेट दर्द से परेशान था तो कोई बुखार, अथवा किसी अन्य बीमारी से।इस दौरान मरीज के तीमारदार इलाज के लिए इमरजेंसी कक्ष में ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक के पास गए। लेकिन चिकित्सक द्वारा इमरजेंसी में आए गंभीर मरीजों का उपचार करने के बाद आने की बात कहकर उन्हे टाल दिया। वार्ड सिस्टर ने चिकित्सक के कुछ देर में आने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।उधर महिला अस्पताल में वार्ड में दो मरीज भर्ती थी, जबकि वार्ड में तैनात सिस्टर बातचीत करने में मशगूल थी। वहीं इमरजेंसी ड्यूटी पर डॉ. रीमा यादव ने वार्ड में भर्ती मरीजों को देखा। लेकिन अस्पताल में सुरक्षा के लिए नियुक्त एक भी गार्ड ड्युटी पर तैनात नहीं दिखा, जबकि यहां सुरक्षा के लिए दस से अधिक सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती है।अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था न होने के चलते महिला दलालों के साथ अन्य लोग बेरोकटोक के अस्पताल में घूम रहे थे।
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