मऊ। स्वास्थ्य विभाग का सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा जिले में कागजी साबित हो रहा है। ऐसा ही जिला महिला अस्पताल में हो रहा। जहां महिला विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से सीजेरियन ऑपरेशन नहीं हो रहे। ऐसे में कुछ माह पूर्व एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक सर्जन को बुलाकर किसी तरह व्यवस्था कर दो ऑपरेशन कराए गए। सीजर न होने की स्थिति में यहां तैनात दो बेहोशी के डॉक्टर बिना काम किए ही वेतन उठा रहे। जबकि सीएमएस द्वारा ओपीडी में आने वाली महिला मरीजों का उपचार एक आयुष चिकित्सक कराया जा रहा। अस्पताल महिलाओं को विशेष चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए बना है। पांच मंजिला इस अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को छोड़ दिया जाए तो यहां अत्याधुनिक एसएनसीयू वार्ड, महिला वार्ड, ओटी आदि की सुविधा है। वर्तमान में 26 चिकित्सकों के सापेक्ष केवल तीन चिकित्सक है, जिसमें दो बेहोशी और एक लेडी मेडिकल ऑफीसर। अस्पताल में रोजाना 300 से 400 की ओपीडी होती हैं। वर्तमान में ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच एक संविदा लेडी मेडिकल ऑफीसर तथा एक संविदा आयुष पुरूष चिकित्सक के भरोसे संचालित हो रही है। वहीं लेडी मेडिकल ऑफीसर की ट्रेनिंग में हैं, वहीं दो अन्य चिकित्सकों में एक सीएमएस के पद पर तैनात होने के चलते इलाज नहीं करते हैं, जबकि दूसरे चिकित्सक बेहोशी का चिकित्सक का हवाला देते हुए ओपीडी के बजाए ओटी में ड्यूटी होने का दावा करते हैं। चौकाने वाली बात यह है कि अस्पताल में एक भी गायनिक चिकित्सक की तैनाती दो सालों नहीं हो सकी हैं। तत्कालीन सीएमएस डॉ. माधुरी सिंह के स्थानांतरण के बाद से 2017 से अब तक केवल दो ही गर्भवती का सीजर आपरेशन हुआ है। वो भी मुहम्मदाबाद गोहना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात सर्जन डॉ. तोषी सिंह द्वारा मई तथा जून 2019 में अल्प तैनाती के समय किया गया था। एक लेडी मेडिकल ऑफीसर 6 माह की विशेष ट्रेनिंग पर गई हुई है। ऐसे में महिला अस्पताल में बीते दो सालों से केवल सुरक्षित प्रसव ही कराए जा रहे हैं, जबकि गंभीर स्थिति में चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार कर निजी अस्पताल रेफर कर दिया जा रहा है। परदहा ब्लाक के ताजोपुर निवासी ममता ने बताया कि वह अपनी बहु अर्निका मिश्रा को लेकर अस्पताल आई, लेकिन ओपीडी में संविदा महिला चिकित्सक गायब थी। वहीं एक आयुष पुरुष चिकित्सक मरीज का इलाज करते मिला। लेकिन लंबी लाइन के चलते वह बिना इलाज कराए वापस हो गई। वहीं कोपागंज के लाडनपुर निवासी रमिता तथा घोसी के बड़ागांव से आई सुनैना ने भी इलाज ना मिलने की बात कही। बताया वह दो तीन दिन यहां आई लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी। ऐसे में उसे प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। इस बाबत सीएमएस डॉ. आरके गुप्ता का कहना है चिकित्सकों की तैनाती को लेकर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।