सूरजपुर के रसूलपुर आश्रम के पास घाघरा नदी द्वारा हो रही कटान को रोकने के लिए नदी में पेड़ डालते लो?
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सूरजपुर। क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम में लगातार सातवें दिन कटान जारी रही। नदी के बैकरोलिंग कर बस्ती की तरफ कटान कर तेजी से बढ़ रही है। कई मकानों के पास की भूमि नदी में विलीन हो गई। नदीके रौद्र रुप को देखकर तटवर्ती इलाकों में अफरातफरी का मची है। लोग घरों में सामानों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हुए हैं। लेकिन सिंचाई विभाग नदी में पेड़ों की डालकर इतिश्री की जा रही है। जबकि कटापीड़ित नदी में बोल्डर डालने की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम में कटान जारी रहने से तटवर्ती इलाकों के लोगों को भूमिहीन होने की चिंता सताने लगी है। नदी के उग्र रुप धारण करने से तटवर्ती गांवों में अफरातफरी का माहौल है। अपने घरों के सामानों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने मे लगे हुए हैं। वहीं घाघरा नदी में हो रहे कटान को रोकने के लिए सिचाई विभाग द्वारा हजारों पेड़ों की डालियों को नदी में डाला गया, लेकिन नतीजा बेअसर रहा। अब तक सैकड़ों बीघा भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। आबादी की लगभग दो जरीब चौड़ी जमीन घाघरा नदी में विलीन हो गई। नदी के बैकरोलिंग से सुबाष यादव, सत्येंद्र यादव, भगवान यादव के मकान की पास की भूमि नदी में विलीन हो गई। इस संबंध में रसूलपुर ग्राम प्रधान अखिलेश यादव, कांग्रेस नेता लालबहादुर यादव, कोटेदार संघ के जिलाध्यक्ष सुबाष चंद्र पटेल, जिला पंचायत सदस्य इंद्र कैलाश यादव का कहना था कि सिचाई विभाग द्वारा कटान रोकने के लिए कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं किया गया। केवल खानापूर्ति की जा रही है। कटान समस्या का अविलंब समाधान नहीं किया गया तो हम लोग आंदोलन करने को बाध्य हो जाएंगे।