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कटान रोकने के इंतजाम नाकाफी, बढ़ी मुश्किलें

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सूरजपुर के रसूलपुर आश्रम पर घाघरा नदी द्वारा हो रही कटान। - फोटो : MAU
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सूरजपुर। घाघरा नदी कीबैकरोलिंग से रसूलपुर आश्रम सहित आसपास के तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। छह दिनों बाद भी कटान रोकने में सिंचाई विभाग द्वारा खानापूर्ति किए जाने से पीड़ितों में आक्रोश पनपने लगा है। विभाग की तरफ से ठोस कार्ययोजना बनाए जाने की मांग उठने लगी है। क्षेत्र के रसूलपुर आश्रम में लगातार छठवें दिन भी कटान पर अंकुश न लगने के चलते तटवर्ती इलाके के लोगों को अनिष्ट की चिंता सताने लगी है। सिचाई विभाग नदी में पेड़ों की डालकर कटान रोकने का प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है। नदी के बैकरोलिंग करने से तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कटान पीड़ित शिवनाथ यादव, नरसिंह यादव, मालती देवी, फतिया देवी का अपना घर और जमीन कटते देख रो-रो कर बुरा हाल है। घाघरा नदी शिवनाथ यादव एवं नरसिंह यादव के घर के सामने बने शौचालय की टंकी को नदी अपने आगोश में लेने के लिए बेताब है। कटान जारी रहने से अब तक लगभग 75 फीट की चौड़ाई में अब तक करीब आठ बीघा जमीन घाघरा नदी अपने आगोश में ले चुकीं है। रसूलपुर आश्रम पर हो भीषण कटान के कारण तटवासी शिवनाथ यादव नरसिंह यादव, रमायन यादव, फतिया देवी, राजाराम यादव, सुबाष यादव, अवधेश यादव नदी के रौद्र रुप धारण करने से लोग दहशत में जी रहे हैं। कटान के कारण तटवासी अपना अपना सामान लेकर पलायन कर रहे हैं। रसूलपुर आश्रम के ग्राम प्रधान अखिलेश यादव का कहना था कि सिचाई विभाग की तरफ से कटान रोकने के लिए खानापूर्ति की जा रही है। कटान को रोकने के लिए बोल्डर गिराया जाए। कटान स्थल पर आने वाले जनप्रतिनिधि एवं सिंचाई विभाग के अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। अभी किसी ने कटान रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया। उधर छठवें दिन भी सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता प्रदीप कुुमार के नेतृत्व में सिंचाई विभाग के कर्मचारी नदी में पेड़ों की डालियां डालते रहे। लेकिन समस्या से निजात नहीं मिल सकी।
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