मऊ। समाज कल्याण विभाग की तरफ से जिले में संचालित अनुदानित अंबेडकर प्राथमिक विद्यालयों में बीते वर्षों में हुई शिक्षक नियुक्ति के मामले में बरती गई अनियतिता की जांच अब पीआईएल के तहत कोर्ट में सुनी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने एक संस्था की तरफ से की गई शिकायत को संज्ञान में लेकर यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने इस मामले को पीआईएल में लिस्टेड कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरु कर दी है। ऐसे में 90 शिक्षक कार्रवाई की जद में हैं। बताते चले बीते वर्षो में समाज कल्याण विभाग की तरफ से विभिन्न आंबेडकर विद्यालयों में बिना कोई विज्ञप्ति और अनुमोदन के शिक्षको की तैनाती की गई। तत्कालीन डीएम प्रकाश बिंदु ने 24 फरवरी 2018 को छापेमारी कर बीएसए कार्यालय से की गई नियुक्ति की फाइलों को कस्टडी में लेकर 20 स्कूलों के 74 शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच कराई थी। गांव बचाओं मोर्चा के अध्यक्ष उदय प्रताप राय ने आरोप लगाया कि प्रशासन की तरफ से इस मामले की जांच सही तरीके से नही कराई गई। शिकायती पत्र को संस्था के अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री और रजिस्ट्रार सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय इलाहाबाद को भेजा था। उन्होंने नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए किए गए गोलमाल को दर्शाया था। शिकायती पत्र को सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञान में लिया और जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। जिसकी प्रकिया शुरू हो गई है। इस संबंध में उदय प्रताप राय ने बताया कि मजिस्ट्रीयल और विभागीय जांच में बहुत अंतर है। बताते चले अमर उजाला के द्वारा प्रकाशित की गई खबर पर 24 फरवरी 2018 को छापेमारी कर नियुक्ति की फाइलों को कस्टडी में लेकर जांच शुरु कराया था। बाद में अमर उजाला ने अपने 26 मई 2019 के अंक में की गई शिकायत की खबर को भी पेज नंबर तीन पर प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामले की जांच शासन से संयुक्त निदेशक समाज कल्याण सुनील कुमार सिंह बिसेन की अध्यक्षता में जिला समाज कल्याण अधिकारी चंदौली और डीडीआर गोंडा की तीन सदस्यीय टीम ने किया था। जांच में समिति ने 42 शिक्षको का अनुमोदन होना नहीं पाया। मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई चेहरे बेनकाब होगें और इस घोटाले का पर्दाफाश होगा।