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गैरहाजिर शिक्षकों पर अंकुश नहीं लगा पा रहा विभाग

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मऊ। शिक्षा सत्र का चार माह बीत गया, लेकिन परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के गैरहाजिर होने पर विभाग अंकुश नहीं लगा पा रहा। शासन प्रशासन के तमाम फरमान जारी करने के बाद भी बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही। विभागीय और प्रशासनिक अधिकारियों के औचक निरीक्षण में अबतक 100 विद्यालयों के 70 सहायक अध्यापक गैरहाजिर मिले हैं। ऐसे लापरवाह शिक्षकों का एक दिन का वेतन रोककर कार्रवाई तो की गई। लेकिन अभी तक ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है। जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शासन की तरफ से परिषदीय विद्यालयों मेें बच्चों की शत प्रतिशत उपस्थिति, ठहराव आदि के लिए मिड-डे-मील, नि:शुल्क ड्रेस, नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक सहित तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके अलावा शैक्षिक गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए विभाग में भारी भरकम स्टाफ की तैनाती भी है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण में शिक्षकों के गैरहाजिर होने का सिलसिला जारी है। एक दिन का वेतन रोकने के साथ ही इनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके बाद भी अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की नामांकन के सापेक्ष कम उपस्थिति, शिक्षिकों के गैरजिम्मेदाराना रवैए से पठन पाठन भगवान भरोसे है। अधिकारियों की मानें तो 16 अगस्त से प्रति ब्लाक में लगातार तीन दिन तक 10-10 विद्यालयों का औचक निरीक्षण होगा। नगर शिक्षा अधिकारी एके गौतम का कहना है कि शैक्षिक गुणवत्ता पर नजर रखी जा रही है। सूक्ष्म मानीटरिंग के चलते सहायक अध्यापकों के कार्य में काफी सुधार आया है। बीएसए ओपी त्रिपाठी ने बताया कि सरकारी तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को पुरस्कृत तथा लापरवाह शिक्षकों को दंडित किया जा रहा है।
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