मधुबन के शहीद स्मारक के बगल में शव दफनाने को लेकर घंटो तकरार के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम लाल बाबू
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मधुबन। बाजार में गुरुवार को उस समय तनातनी कि स्थिति पैदा हो गई, जब पूर्व में इस्लाम धर्म कबूल कर मुस्लिम महिला से विवाह करने वाले 50 वर्षीय अधेड़ की मौत हो गई। परिवार ने शव लेने से इंकार किया जबकि अन्य लोग हिंदू रीति से अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे। सूचना पर एसडीएम ने पहुंच कर मामला सुलझाया तब जाकर कर्मचंद उर्फ असलम को दफभन किया गया। मधुबन थाना क्षेत्र के उफ़रौली गांव निवासी कर्मचंद वर्मा ने काफी समय पहले एक मुस्लिम महिला से प्यार कर उससे धर्म परिवर्तन कर शादी कर ली थी। उसने अपना नाम मुहम्मद असलम रखा था। घटना के बाद कर्मचंद को उसके पजिनों ने घर से निकाल दिया था। जिस पर पत्नी संग बाजार में शहीद स्मारक के पास गोविंद चौरसिया के मकान में किराए पर रहने लगा। कर्मचंद के एक पुत्र और एक पुत्री हुई। जिसका नाम उसने फातिमा और अब्दुल करीम रखा। दो साल पहले कर्मचंद की पत्नी की मौत हो गई। जबकि वह बाल बच्चों की परवरिश करता रहा। बुधवार की रात असलम कि भी मौत हो गई । लोगों ने इसकी सूचना मृतक के भाई धर्मचंद वर्मा को दी। जबकि धर्मचंद ने कर्मचंद को अपना भाई मानने से इंकार कर दिया। जबकि कुछ लोग कर्मचंद को हिंदू होने का दावा कर उसका उसी रिति रिवाज से अंतिम संस्कार करना चाह रहे थे। ऐसे में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया । बाद में एसडीएम मधुबन लाल बाबू दूबे मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले को सुना और असलम के शव का मुस्लिम रिति रिवाज से अंतिम संस्कार करने की बात कही। इसके बाद मामले का हल निकला।