नगर के डीसीएसके पीजी कालेज सभागार में हिन्दुस्तनी एकेडमी प्रयागराज और डीसीएसके पीजी कालेज के सं
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मऊ। हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज तथा डीसीएसके पीजी कालेज के संयुक्त तत्वावधान में नगर स्थित डीसीएस खंडेलवाल पीजी कालेज में नवगीतकार डॉ. उमाशंकर तिवारी और नवगीत विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उमाशंकर ने महत्वपूर्ण कवि के रूप में अपना स्थान बनाया था। मुख्य अतिथि डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि नवगीत आंदोलन हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी। इस आंदोलन के एक महत्वपूर्ण कवि के रूप में डॉ. उमाशंकर तिवारी ने अपना स्थान बनाया। उन्होंने हिन्दुस्तानी एकेडमी की सक्रियता और उसको सुदूर अंचल तक पहुंचाने के अपने संकल्प को दोहराया। विशिष्ट अतिथि छपरा के जयप्रकाश विश्वविद्यालय के प्रो. सिद्धार्थ शंकर ने कहा कि डॉ. उमाशंकर तिवारी की कविता में साझी संस्कृति की महक है। अध्यक्षता करते हुए कालेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार मिश्र ने कहा कि महाविद्यालय का सौभाग्य है कि उमाशंकर तिवारी जैसे साहित्यकार हमारे यहां पर थे। संगोष्ठी को डॉ. सिद्धार्थ शंकर, प्रो. बाबूराम त्रिपाठी, डॉ. सदानंद सिंह, डॉ. शिखा तिवारी ने संबोधित किया। संचालन डॉ. सर्वेश पांडेय ने किया। दूसरे सत्र की अध्यक्षता करते हुए छपरा विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार ने नवगीत आंदोलन की चर्चा करते हुए उमाशंकर तिवारी के अवदानों की विस्तार से चर्चा की। गोरखपुर के डॉ. नित्यानंद श्रीवास्तव ने कहा कि छायावाद तक रूपभेद को लेकर हिंदी आलोचना में कोई विशेष आग्रह नहीं है। इस दौरान डॉ. चंद्र प्रकाश राय, संतोष तिवारी, गजाधर शर्मा गंगेश, हरेराम सिंह, डॉ. रामप्रवेश सिंह आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। सत्र में धन्यवाद ज्ञापन धीरज मिश्र ने किया।