छठ पर्व पर नगर के मड़ईयाघाट पर उदयांदल भाष्कर को अर्घ्य देने के पूर्व पूजन अर्चन करती महिला।
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मऊ। जिला मुख्यालय समेत पूरे जनपद में मनाया जा रहा सूर्योपासना का महापर्व डाला छठ पर रविवार की अलसुबह में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही खत्म हो गया। तमसा नदी तट, देवलास मंदिर, सरयू तट एवं वनदेवी धाम में बने सैकड़ों घाटों पर महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। सरयू नदी, तमसा तट पर छठ के चौथे दिन रविवार की सुबह तय समय 6:35 बजे पर उगते सूर्य को व्रतियों ने अर्घ्य दिया और छठी मैया की पूजा कर अपना पारण किया। व्रतियों ने गन्ने के बीच में मिट्टी के हाथी जो भगवान गणेश के रूप में होते हैं व कलशी रखा, गन्ने के पास मिट्टी के बर्तन में प्रसाद रखकर दीप जलाया। नदी और पोखरों के घाटों पर पूरी तरह मेला जैसा दृश्य नजर आया। इस मौके पर नगर के शीतला माता धाम, ब्रह्मस्थान, तमसा तट स्थित भीटी, हनुमानघाट, ढेकुलियाघाट, बमघाट, नागा बाबा की कुटी, वनदेवी धाम स्थित पोखरा, देवलास स्थित सरोवर पर भारी संख्या में व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। उधर नगर के ब्रह्मस्थान, शीतला माता धाम, तमसा तट स्थित भीटी, हनुमानघाट, ढेकुलियाघाट सहित विभिन्न स्थानों पर बने घाटों पर तड़के से ही भारी भीड़ रही। भक्तिगीतों के बजते रहने तथा बैंडबाजों के बजते रहने से चहुंओर खुशियों से सरोबार रहा। इसके पूर्व चार दिवसीय अनुष्ठान के तीसरे दिन शनिवार को अस्ताचलगामी सूर्य (डूबते सूर्य) को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पूजा किया। कुछ स्थानों पर महिलाओं के साथ ही पुरुषों ने भी अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए छठ का व्रत किया। जगह-जगह बने छठ घाटों पर शाम को भारी भीड़ मौजूद रही। कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। जहां कलाकारों ने भोजपुरी गीतों से सभी का मनमोह लिया। परिवार, देश, समाज में सुख -समृद्धि की कामना किया। देवलास स्थित सूर्य मंदिर के छठ घाट पर इस बार अन्य वर्षों की तुलना में ज्यादा भीड़ दिखी। तमसा और सरयू तट पर बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की।