मऊ। विशेष न्यायाधीश एससी /एसटी एक्ट बुद्धिसागर मिश्रा ने मारपीट के मामले में शुक्रवार को नामजद पांच आरोपियों में चार सगे भाइयों को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई। साथ ही एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड न देने पर तीन-तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, एक आरोपी की मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई। मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, शहर कोतवाली क्षेत्र के मलिक ताहिरपुरा निवासी पिंटू कुमार पुत्र फूलबदन हरिजन की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें मलिक ताहिरपुरा निवासी हरचन उर्फ हरिश्चंद्र पुत्र बुद्धिराम और दिनेश, रमेश, हरिकेश और प्रवेश पुत्रगण हरचन उर्फ हरिश्चंद्र को आरोपी बनाया गया। वादी का कथन है कि नौ मार्च 2012 की रात में आरोपीगणों ने उसके पिता फूलबदन और दादा श्री कृष्ण को मारपीट कर घायल कर दिया और जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए विशेष लोक अभियोजक सतेंद्रनाथ राय ने तीन गवाह पेश कर अपना पक्ष रखा। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण दिनेश, रमेश, हरिकेश और प्रवेश को बलवा, मारपीट, गाली और धमकी देने का दोषी पाते हुए सभी को एससी /एसटी एक्ट में तीन तीन वर्ष की सजा के साथ ही एक एक हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। धमकी देने के मामले में एक एक वर्ष की सजा तथा बलवा, मारपीट और गाली देने के मामले में छह छह माह की सजा का निर्णय सुनाया। आरोपी हरचन उर्फ हरिश्चंद की मुकदमे के दौरान मौत हो जाने पर उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।