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मकसद में कामयाब नहीं हो रहे पशु आश्रय स्थल

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मझवारा के सरस हाट में बनाया छुट्टा पशुओं के रखने के लिए बनाया गया स्थल। - फोटो : MAU
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मऊ। जिले के विभिन्न क्षेत्रों मेें बने अस्थायी पशु आश्रय स्थल मकसद में कामयाब नहीं हो रहे। ऐसे में किसानों को छुट्टा पशुओं से निजात मिलती नजर नहीं आ रही है। इन पशुओं को पशु आश्रय स्थल पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी गई है। इसके साथ ही पंचायती राज विभाग सहित पशुपालन विभाग को इसकी मानीटरिंग करना है, लेकिन क्रियान्वयन कागज पर हो रहा है। अब तक जिले में 23 अस्थायी पशु आश्रय स्थल बनाए जा सके हैं। विभागीय अभिलेखों में सिर्फ 948 छुट्टा पशु बताए जा रहे हैं। पशु आश्रय स्थलों में रखे पशुओं की सही ढंग से देखभाल नहीं हो पा रही है। कई पशुओं की अब तक मौत हो चुकी है। छुट्टा पशुओं पर एक वर्ष में 60 लाख खर्च भी हो चुका है। हालत यह है कि छुट्टा पशुओं के आतंक से किसानों का गुस्सा फूटने लगा है। अब वह छुट्टा पशुओं को स्कूलों में बंद करने लगे हैं। सब कुछ जानते हुए विभागीय अधिकारी मौन हैं। जिले में 684 ग्राम पंचायतें हैं। इसके साथ ही एक नगरपालिका तथा नौ नगऱ पंचायतें हैं। छुट्टा पशुओं के आतंक से हर तबके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। गाजीपुर-वाराणसी मार्ग सहित ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशु सुबह से लेकर देर रात तक घूम रहे हैं। मार्ग पर पशुओं के इधर-उधर दौड़ने की वजह से खासकर बाइक सवार बचने के चक्कर में गिर जा रहे है। मेहनत कमाई की फसल को छुट्टा पशु बर्बाद कर दे रहे हैं। शिकायत के बाद भी संबंधित विभाग ध्यान नहीं दे रहा।
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कोट
पशुपालक गाय बछड़ों को छोड़ दे रहे हैं। इस पर नजर रखने के लिए ग्राम प्रधानों को रिपोर्ट करना है। डॉ. भगवान सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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