नगर के रोडवेज परिसर में बस न होने से परेशान खड़े यात्री।
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मऊ। जिले में रोडवेज बसों की सुविधा बदहाल स्थिति में है। यात्री सुविधाओं की कमी के साथ ही डिपो चालकों की कमी से भी जूझ रहा है। वर्तमान में मऊ तथा दोहरीघाट डिपो 84 बसों का संचालन संविदा चालकों के भरोसे कर रहा है। इनकी कमी होते ही परिवहन निगम की परेशानी बढ़ जाती है। बसें चालकों के अभाव में डिपो में ही खड़ी रह जाती हैं। चालकों की कमी से अकेले मऊ डिपों को ही रोजाना 40 हजार रुपये का राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा हैं। वहीं कम बसों का संचालन से विभिन्न रूटों के यात्रियों को भी समस्या से जूझना पड़ रहा है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि चालकों की कमी दूर करने का प्रयास किया जा रहा हैं। बताते चले कि मऊ डिपो में 45 बसों का बेडा है। जो गोरखपुर, गाजीपुर, बलिया, लखनऊ रूटों पर संचालित की जाती है। इन सभी बसों का संचालन करने के लिए 45 बसों पर 97 चालकों की नियुक्ती होनी चाहिए। जबकि इसके विपरित केवल 88 चालक ही तैनात है। इसमें 21 स्थायी जबकि 67 संविदा चालक है। यही स्थिति दोहरीघाट डिपो में है। जहां 39 बसों के लिए संचालन के लिए तैनात 96 चालक तैनात है। जिसमें 38 स्थायी चालक जबकि 58 संविदा चालक है। ऐसे में जिले में रोडवेज बसें केवल संविदाकर्मियों के भरोसे ही संचालित हो रही है। सूत्रों की माने तो संविदाकर्मियों की भर्ती तो प्रत्येक वर्ष होती है, लेकिन कार्य की अधिकता तथा कुछ चालकों द्वारा अनियमितता में पकड़े जाने पर नौकरी छोड़े जाने पर हमेशा इनकी कमी बनी रहती है। वर्तमान में मऊ में चालकों की कमी के चलते ना केवल 2 हजार किमी का फेरा कम होने के चलते प्रतिदिन 40 हजार रुपये का राजस्व का नुकसान हो रहा है। जबकि इस रूट के यात्री भी सरकारी बस न मिलने के चलते ज्यादा पैसा देकर निजी वाहनों में यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
कोट
चालकों की कमी बनी हुई है। इसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही इस समस्या का निपटरा कर दिया जाएगा।
विवेकानंद त्रिपाठी, एआरएम रोडवेज डिपो