मल्लाह टोला में 22 साल बाद भी विवाह घर अधूरा पड़ा है। जबकि इसका पूरा भुगतान उसी समय हो गया था। भवन की चहारदीवारी बनाकर छोड़ दी गई है। वर्तमान में वहां खंडहर बच गया है। जहरीले जीव जंतुओं का डेरा बनकर रह गया है। जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते कस्बेवासियों को शादी के लिए मैरिज हॉल बुक करने के लिए 50 से 70 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कस्बेवासी इसका निर्माण पूरा करने के लिए शिकायत दर्ज कराकर थक चुके हैं। लेकिन जिम्मेदारों ने इसको लेकर कभी रुचि नहीं दिखाई।
दोहरीघाट कस्बे के लोगों को शादी विवाह में परेशानी न उठानी पड़े। बारात ठहराने के लिए एक सुनिश्चित स्थान मिल सके इसके लिए वर्ष 2002 में डूडा द्वारा दोहरीघाट नगर पंचायत के मल्लाह टोला में विवाह घर निर्माण का प्रस्ताव पास हुआ। इसके लिए 10 लाख रुपये का बजट मिला था। जब विवाह घर का निर्माण शुरू हुआ तो स्थानीय लोगों को काफी खुशी हुई। इस संबंध में महेंद्र साहनी, मुन्ना साहनी, सभासद मनोज जायसवाल, श्रीप्रकाश सोनकर, संदीप मद्धेशिया आदि नगर वासियों ने बताया कि अब तो विवाह घर की चहारदीवारी भी जर्जर हो चुकी है जो कभी भी गिर सकती है। कस्बा में सभी के मकान इतने पास पास हैं कि शादी विवाह के लिए जगह ही नहीं बची है। गलियों में व्यवस्था करने पर लोगों का आवागमन बाधित होता है। विवाह घर का निर्माण पूरा कराने के लिए जनप्रतिनिधियों और विभाग के अधिकारियों को अवगत कराया गया। लेकिन सुनवाई नहीं होती है।