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क्रोध व अहंकार से सबसे पहले भ्रष्ट होती है मनुष्य की बुद्धि

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दोहरीघाट स्थित अंतर्राष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में आयोजित नौ दिवसीय आदि शक्ति अखंड महायज्ञ मे? - फोटो : MAU
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दोहरीघाट। अंतरराष्ट्रीय मातेश्वरी महाधाम में चल रहे नौ दिवसीय आदिशक्ति अखंड महायज्ञ के आठवें दिन शनिवार को सदगुरु महाराज ने कहा कि क्रोध व अहंकार से सबसे पहले मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट होती है। मनुष्य के गुणों की पूजा सर्वदा होती है न कि उसके द्वारा अर्जित किए गए संपत्ति की। इसलिए कभी भी धन-संपत्ति का घमंड नहीं करना चाहिए। प्रवचन के दौरान कहा कि सदा मां आदिशक्ति के चरणों में भक्ति प्रेम से अटूट विश्वास रखकर सद्गुरु द्वारा बताए गए सत्कर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। जिन मां के भक्तों पर मां आदिशक्ति और सद्गुरु की कृपा बरसने लगती है, जिससे मनुष्य के कामादिक चोरों का स्वत: नाश होने लगता है। जैसे-जैसे मनुष्य के अंदर बुराइयां कम होने लगती है। वह मां आदिशक्ति और सद्गुरु के नजदीक आ जाता है। परिणाम स्वरूप उसका जीवन सुखमय बन जाता है।
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