मऊ। पेट्रोलियम पदार्थो की बढ़ी कीमतों के बाद आसमान छू रही महंगाई की मार बीमारों के इलाज पर भी पड़ गई। बुखार, दर्द निवारक व एंटीबायोटिक दवाओं की कीमतों में इस माह से दस फीसदी तक बढ़ोत्तरी हुई है। ऐसे में महंगी हुई दवाइयों ने मरीजों के दर्द को और बढ़ा दिया है। इसके चलते ही महंगी दवाओं से इलाज करा रहे मरीजों का दर्द कम होने की जगह और बढ़ जा रहा है। महंगी हुई दवाओं ने मरीजों से लेकर तीमारदारों तक की चिंता बढ़ा दी है। जरूरी सामान और खाद्यान्न की महंगाई ने लोगों की पहले ही कमर तोड़ रखी है। अब दवाएं भी महंगी हो गई हैं। एक निजी अस्पताल के फार्मासिस्ट शिवशंकर प्रसाद ने बताया कि पहली अप्रैल से ही दर्द निवारक, विभिन्न संक्रमण, हृदय, किडनी और अस्थमा के मरीजों की दवाओं की फुटकर कीमतों में दस फीसदी तक बढ़ोत्तरी हो गई है। ज्यादातर निजी अस्पतालों में अपने खुद के मेडिकल स्टोर संचालित हैं। डॉक्टर वही दवा मरीज को लिखते हैं, जो सिर्फ उनके मेडिकल स्टोर पर मिलती है। अगर उस सॉल्ट की दवा दूसरे मेडिकल से खरीद ली जाए तो डॉक्टर उसे मरीज को देने से साफ मना कर देते हैं। सदर चौक स्थित एक मेडिकल स्टोर पर दवा लेने आए संजीव वर्मा, महेंद्र सिंह ने बताया कि हृदयरोग की दवा पहले आठ सौ रुपये हर सप्ताह में लगती थी लेकिन अब यह खर्च बढ़ कर 900 रुपये हो गया है। सहादतपुरा निवासी गोविंद सिंह ने बताया कि घर में दो लोगों की नियमित दवाएं चलती हैं। ऐसे में अब दवाओं के महंगाई से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजामुद्दीनपुरा निवासी सावित्री देवी न बताया कि दवाओं के महंगा होने से आम लोगों की कमर टूट गई है। प्रिंट रेट पर सारी दवाइयां मिलती हैं जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
लगाई है। संवाद